प्रेयसी : Season–1
तुम्हारा मिलना क्यों ख़्वाब नहीं हो जाता? 💭
तुम्हारी कोई तस्वीर
अब मेरे पास नहीं है 🖼️💭
आंखों में कुछ धुंधले प्रतिबिंब हैं 🌫️
किंतु उनसे
तुम्हारी छवि नहीं बन सकती… 🌙
तुम्हें भूल पाना
सृष्टि का सबसे कठिन कार्य प्रतीत होता है 🌌💔
एक क्षण सोचता हूँ —
"कि तुम्हारी छवि कैसी दिखती है?" 🤔
यह भूल चुका हूँ… 🍂
लेकिन प्रेम की छवि
जो हृदय में उतर चुकी है ❤️🔥
वो क्यों नहीं भूला जाता? 🌧️
तुम्हें सोचने से पीड़ा क्यों मिलती है? 💭💔
क्यों उस पीड़ा में सुकून मिलता है? 🌙🕊️
ख़्वाबों से तो हर रोज़ मिलता हूँ 🌠
फिर तुम्हारा मिलना
क्यों ख़्वाब नहीं हो जाता? 🌌💤
किताब : मैं उसको ढूढूंगा अब कहां?
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
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