प्रेयसी : Season–1
प्रेम पूजा है 🥀
ईश्वर की आराधना ही
अब एकमात्र उद्देश्य रहा 🙏✨
प्रेम पूजा है,
किंतु वह प्रेम नहीं जो किसी स्त्री से हो 🌸
स्त्री से मैंने प्रेम देखा,
स्त्री का प्रेम मैंने देखा 💫
तुम नहीं थे, प्रेम था, सम्मान था,
तुम थे, प्रेम था, सम्मान नहीं,
तुम नहीं हो, प्रेम है, सम्मान है 🌙
और तब समझ आया —
एक स्त्री को सम्मान देना,
उससे प्रेम करने से अधिक मूल्यवान है 🕊️💖
बिछड़ाव, प्रेम की सबसे विदारक घटना थी 💔
इस बिछड़ाव ने
मुझे कठोर बना दिया है 🪶➡️🪨
अब इतनी कठोरता है मुझमें,
कि प्रेम से घृणा प्रतीत होती है 🌑
किंतु जब दो प्रेमी
नयन के सामने आते हैं 👁️💞
तो कुछ स्मृतियाँ पुनः
इस कठोरता को कोमल बना देती हैं 🌧️🌷
उस क्षण लगता है,
काँटों का कोई गुच्छा
पूरे शरीर में चुभ रहा है 🌹⚡
और फिर भी —
कहीं भीतर
एक प्रार्थना सी भावना जन्म लेती है,
कि प्रेम भले ही टूट जाए,
उसकी करुणा सदा जीवित रहे। 🌙🕊️
किताब : मैं उसको ढूढूंगा अब कहां?
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
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Nice novel i read this best in all
ReplyDeleteI wont to you write more novels best of luck
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