तुम जगत के रचयिता, मैं निमित्त मात्र हूँ,
शून्य मेरा हृदय, शून्य ही मात्र हूँ।
तार–तरल सृष्टि तिर्यक लगे,
नभ, खग, ऊषा नाथ तुम संग जगे,
स्वप्न शतदल तेरी, माया ही सब यहाँ,
बेसुध मनुज– मिथ्या ही मथ रहा,
आ निकालो प्रभो देहभव भ्रांत में,
भ्रांति ही यह जगत, मैं भ्रमित रात्रि हूँ,
तुम जगत के रचयिता, मैं निमित्त मात्र हूँ,
शून्य मेरा हृदय, शून्य ही मात्र हूँ।
गृहमृग तुम्हारा शरभ, दिव्य हे!
पालक तुम्हीं मैं वृषभ, दिव्य हे!
कर्म जो कुछ करूं पद–प्रणत श्रेय है,
मेरी भंगुर प्रवृति, नाम तेरा अजेय है,
गुण कोई मुझमें नहीं हे गुणागार हे,
मैं केवल तुम्हारी दया पात्र हूँ,
तुम जगत के रचयिता, मैं निमित्त मात्र हूँ,
शून्य मेरा हृदय, शून्य ही मात्र हूँ।
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion✨❤️ आर्यभट्ट जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ❤️✨
आज का दिन केवल एक महान गणितज्ञ को याद करने का नहीं, बल्कि उस सोच को अपनाने का है जिसने “शून्य” को भी अर्थ दिया। 🌌
आर्यभट्ट जी ने हमें सिखाया कि सीमाएँ सिर्फ मन की होती हैं, ज्ञान की नहीं। 📖✨
मेरे सभी पाठकों के लिए आज एक छोटी-सी बात— 💬
🌱 सीखना कभी बंद मत कीजिए
🔍 जिज्ञासा को जिंदा रखिए
🚀 अपनी सोच को इतना विस्तृत बनाइए कि असंभव भी संभव लगे
हम सब अपने-अपने जीवन में किसी न किसी रूप में “शून्य” से शुरू करते हैं,
लेकिन वही शून्य, सही दिशा मिले तो अनंत बन जाता है। ♾️
🙏 आप सभी को आर्यभट्ट जयंती की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ ✨
ज्ञान, विनम्रता और जिज्ञासा हमेशा आपके साथ रहे ✨
🩵 सप्रेम,
– Rishabh Bhatt
कई बार जीवन अपने जवाब शब्दों के रूप में भेजता है — ऐसे शब्द जो दिमाग़ से नहीं, सीधे आत्मा से उतरते हैं। “Manthan – Season 2” उसी रौशनी का अगला कदम है… एक नया अध्याय, जहाँ हर कविता भीतर चल रहे churn को आवाज़ देती है, और हर भावना खुद को शब्दों में ढालकर आपके सामने खड़ी हो जाती है।
इस बार की कविताओं में एक अलग सा ठहराव है — ना ज़्यादा कठिन, ना ज़्यादा सरल… बस उतनी ही कि आप उन्हें पढ़ें और एक पल को खुद में डूब जाएँ। यहाँ शब्द सिर्फ़ लिखे नहीं गए, उन्हें जिया गया है — हर लाइन दिल की धड़कन के बहुत पास से निकली है।
Season 2 की रचनाएँ फिलहाल किसी भी किताब में पब्लिश नहीं हैं — ये ताज़ी हैं, सच्ची हैं, और सीधे इसी सीरीज के लिए लिखी गई हैं। लेकिन मेरी दूसरी किताबें — Dev Vandana, Mera Pehla Junoon Ishq Aakhri, और Ye Aasma Tere Qadmon Mein Hai — दुनिया भर के कई प्लेटफ़ॉर्म्स पर मौजूद हैं, और वही मेरी कलम की यात्रा की साक्षी भी हैं।
मैं, ऋषभ भट्ट — पेशे से Engineer, पर हृदय से Author और Poet। मेरे लिए कविता कोई विधा नहीं, बल्कि आत्मा की भाषा है। Manthan : Season 2 की हर कविता इसी विश्वास से जन्मी है — कि शब्द अगर सच्चे हों, तो वे रास्ता भी दिखाते हैं और अन्दर की रोशनी भी जगाते हैं।
“Manthan – Season 2” उन सभी के लिए है जो अपने अन्दर के जीवन को सुनना जानते हैं। जो चुपचाप चलते हैं, पर हर कदम के पीछे एक विचार, एक आग, एक संकल्प होता है। ये सीरीज उसी संकल्प को आवाज़ देती है — ताकि आप खुद में झाँकें, खुद को समझें, और अपने सफर को थोड़ी और स्पष्टता, थोड़ी और रौशनी के साथ आगे बढ़ाएँ।
यहाँ शब्द पढ़े नहीं जाते — महसूस किए जाते हैं। यहाँ कविताएँ समझाई नहीं जातीं — वे खुद आपको समझाती हैं। और यही है Manthan – Season 2 का असली सार... ✨