प्रेयसी : Season–1
अपूर्ण प्रेम का सौंदर्य 🪞
प्रेम,
जो मैंने तुमसे किया,
उसका उद्देश्य सांसारिक बंधन नहीं था 💫 —
वह तो आत्मा से आत्मा का संगम था 🕊️,
जैसे राधा ने कृष्ण को पाया,
पर कभी पा न सकी 💔🎶
मेरा प्रेम तुम्हारे साथ
विवाह की पूर्णता तक नहीं 💍,
बल्कि उस पवित्रता तक पहुँचना चाहता था
जहाँ आत्माएँ मौन होकर भी संवाद करती हैं 🌌
तात्पर्य यह है कि,
यदि तुम मेरी होती,
तो मैं संसार की परिधि में बंध जाता 🔗
और प्रेम की उस दिव्यता को खो देता
जो मुक्त थी, निर्मल थी ☁️✨
पर जब बिछड़ाव ने
मेरे हृदय में वियोग का अमृत भर दिया 💧
तो वह पीड़ा भी एक रस बन गई —
श्रृंगार का, भक्ति का, समर्पण का 💞🙏
हृदय जानता था,
कि तुम्हें भूल जाना ही
तुम्हें सबसे सुंदर रूप में संजोना है 🌷
इसलिए मैंने विस्मरण नहीं,
बल्कि त्याग को चुना 🕊️
यह निर्णय कठोर था,
पर यही सत्य था ⚖️
क्योंकि कुछ प्रेम ऐसे होते हैं
जो मिलन में नहीं,
वियोग में पूर्ण होते हैं 🌙
मैं आज भी तुमसे प्रेम करता हूँ,
उतना ही निःस्वार्थ,
उतना ही पवित्र 💖
जितना उस पहले क्षण में था,
जब तुम्हारी आँखों में
मैंने अपने अस्तित्व की झलक देखी थी 👁️✨
हाँ, मैं अब भी तुमसे प्रेम करता हूँ —
पर यह प्रेम अब मांगता नहीं,
बस तुम्हारे सुख में स्वयं को पा लेता है 🌸
और जब रातें शांत होती हैं 🌌,
तो मन के किसी कोने में
तुम्हारा नाम धीरे से गूंजता है 🎶
मानो कृष्ण की बांसुरी
राधा के मन में अब भी बज रही हो 💫🕊️
यह प्रेम अधूरा है,
परंतु इसी अधूरेपन में उसकी पूर्णता है 🌙💖
क्योंकि मैंने संपूर्णता नहीं,
अपूर्णता को ही चुना है 🍃✨
किताब : मैं उसको ढूढूंगा अब कहां?
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
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