प्रेयसी : Season–1
प्रेम का अधूरा पूर्णत्व 💫
तुम्हारा मेरा मिलना,
प्रेम की पवित्रता का सबसे उजला क्षण था 💫 —
मानो दो आत्माएँ सदियों की यात्रा के बाद
एक ही धड़कन में ठहर गई हों 💞
हमारा अलग होना शायद नियति थी 🌌,
पर उस नियति ने धर्म, समाज और समय –
तीनों की सीमाएँ परख लीं 🕊️
तुम्हारे हाथ थामकर बिताया वो एक क्षण 🤝,
मानो अनंत काल का सुख समा गया हो उसमें ⏳
उस एक स्पर्श में मैंने जीवन का अर्थ पाया 💖
और तुम्हारे जाने के बाद
हृदय से करुण भावों का निकल पाना
कभी संभव ही न हुआ 🌧️
स्वीकार करता हूँ —
तुम मेरी प्रेम थीं ❤️
मेरे हर श्वास की मौन प्रार्थना 🙏
मेरे अस्तित्व की छिपी हुई धुन 🎵
पर यह कहना कि
अब तुम मेरी नहीं रही,
और शायद कभी हो भी नहीं सकोगी… 💔
यह वह सत्य है
जिसे स्वीकारने में युग बीत जाते हैं 🌙
फिर भी मैं समय को दोष नहीं दूँगा 🕰️
क्योंकि उसी ने
तुम्हारी स्मृतियों को
मेरे हृदय में सुरक्षित रख छोड़ा है 💭
वक्त ने ही तुम्हें मुझसे दूर किया,
और वक्त ने ही
मुझे तुम्हारे करीब बनाए रखा —
भावों में, यादों में, हर सांस में 🌬️💫
सिर्फ हम ही थोड़े न थे
जिन्होंने बिछड़ने की वेदना जानी 💔
कई प्रेम ऐसे भी होते हैं
जो मिलकर अधूरे रह जाते हैं,
और कुछ ऐसे
जो बिछड़कर भी पूर्ण लगते हैं 🌼
जिन कहानियों का अंत लिखा ही नहीं गया ✍️
उन पर आँसू बहाने से बेहतर है
मुस्कान देना 🙂
क्योंकि प्रेम का अर्थ केवल पाना नहीं,
बल्कि समर्पण और स्वीकृति भी है 🕊️
इसलिए अब मैं बस
तुम्हें अपनी दुआओं में रखता हूँ 🌸
हर नई सुबह में तुम्हारी आभा ढूंढता हूँ 🌅
और हर रात तुम्हारे नाम से
शांति माँग लेता हूँ 🌙🕯️
कुछ लोग आते हैं जीवन में
क्षण भर के लिए,
पर छाप छोड़ जाते हैं
सदैव के लिए… 🌷✨
किताब : मैं उसको ढूढूंगा अब कहां?
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
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