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Urdu Nazmein
"इश्क़, ख़ामोशी, इंतज़ार और जुदाई के एहसासों से गुज़रती नज़्में। इस series में इन्हीं एहसासों को उर्दू के ख़ूबसूरत लफ़्ज़ों में पढ़िए।"
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अक्टूबर 2021 का एक दिन आज भी मुझे याद है। मेरे पास पन्नों पर लिखी हुई कई हिंदी कविताएँ थीं, बहुत-सी बातें थीं जिन्हें मैं शब्द देना चाहता था, लेकिन उन्हें लोगों तक पहुँचाने का कोई रास्ता मुझे मालूम नहीं था। सोशल मीडिया पर अपनी लिखी हुई चीज़ों को कैसे साझा किया जाए, कहाँ से शुरुआत की जाए—इन सबका मुझे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था। व्हाट्सऐप के अलावा जैसे मेरी दुनिया वहीं तक सीमित थी।
फिर एक दिन यूँ ही YouTube पर writing और publishing से जुड़ी कुछ चीज़ें खोज रहा था। कई वीडियो देखते-देखते एक वीडियो सामने आया—Masterclass with Manoj Muntashir।
मैंने उस पर क्लिक किया और देखना शुरू किया। सच कहूँ, उस वक़्त ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे सामने कोई ख़ज़ाना खोल दिया हो। मैंने तुरंत उस चैनल को subscribe किया और फिर एक के बाद एक वीडियो देखने लगा। अगले कुछ हफ़्तों में मैं Manoj sir के चैनल की दर्जनों videos देख चुका था। लिखने को देखने का मेरा नज़रिया बदलने लगा था। शब्दों के पीछे छिपे एहसास समझ आने लगे थे और पहली बार मुझे लगा कि शायद मैं भी अपनी बात कुछ बेहतर ढंग से कह सकता हूँ।
फिर एक दिन मैंने “नशा-ए-इश्क़” लिखी। वो मेरी पहली उर्दू-अदब की कविता थी। उसके बाद “भूल गया” लिखी, जो आज भी मेरी सबसे पसंदीदा कविताओं में से एक है—और शायद आप readers की भी। ❤️
यहीं से “Urdu Nazmein” की नींव पड़ी।
इस series के पहले Season की लगभग हर कविता के पीछे Manoj sir के उसी channel की प्रेरणा रही है। वहीं से मेरी writing को उर्दू की तरफ़ एक नया बहाव मिला। जो शब्द पहले मेरे लिए सिर्फ़ किताबों में हुआ करते थे, धीरे-धीरे मेरे अपने एहसासों का हिस्सा बनने लगे। फिर Season 2 आया। इस बार भी उस सफ़र के लिए सबसे पहला credit उसी channel को जाता है, जो उस वक़्त मेरे सामने किसी teacher से ज़्यादा एक guide की तरह खड़ा रहा। लेकिन अब तक मैं सिर्फ़ videos नहीं देख रहा था—शायरी और नज़्मों की किताबें भी पढ़ने लगा था। शब्दों से रिश्ता थोड़ा गहरा हो चुका था और लिखते हुए पहले जैसी झिझक नहीं रही थी। फिर Season 3, इसे लिखते हुए मुझे एक अलग तरह की खुशी मिल रही है। इस पूरे सफ़र में जब जब readers का प्यार मिला, तो हर नई नज़्म लिखने की वजह और मज़बूत होती गई।
आज “Urdu Nazmein” के 3 Seasons आपके सामने हैं और दिल से इच्छा यही है कि ये सफ़र यहीं न रुके। अभी बहुत-से एहसास हैं जिन्हें शब्द मिलना बाकी है, बहुत-सी नज़्में हैं जो शायद किसी शाम, किसी रात या किसी ख़ामोशी में जन्म लेंगी।
और शायद यही किसी लेखक के सफ़र की सबसे खूबसूरत शुरुआत होती है— जब कोई एक इंसान आपकी लिखी हुई पंक्तियों में अपना थोड़ा-सा एहसास ढूँढ़ता हो।
अगर “Urdu Nazmein” की कोई नज़्म आपको छूई हो, आपकी कोई पुरानी याद लौटाई हो या किसी अपने की याद दिलाई हो, तो comment में अपनी बात ज़रूर बताइए। आपकी एक छोटी-सी प्रतिक्रिया मेरे लिए सिर्फ़ एक comment नहीं, आगे लिखते रहने की एक और वजह है। ❤️
और अगर आपको लगे कि ये शब्द किसी और के दिल तक भी पहुँचने चाहिए, तो इसे अपने दोस्तों के साथ share कीजिए।
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Har playlist, ek alag ehsaas.