आशिकों की गली में
Season–3एक आज उसे फिर कर जाएँ ❤️🌙
वो साहिल है रहेगी, मेरा हो डूबना चाहे,
अदाएं उसकी जादू हैं, करम उसकी, मेरी राहें,
निगाहों में रहेगी तस्वीर उसकी ही मौत तक,
हथेली में उसे दे या जाएगा खुदा वो मौत रख,
अगर तन्हाई में मेरी सफर मिल जाए उसको,
मैं चलना बंद कर दूंगा कदम आखरी रखके,
चलो एक आज फिर हम उसे कर जाएं हंसके,
के रोएगा दिल मेरा, आंसू सम्हल जाएंगे हल्के।
तरस के देखना मत मोहब्बत मेरी दुआरी है,
ग़मों की रौशनी में नहीं बेबस बेचारी है,
मदीनों–मंदिरों से गुजर जाती है केवल हँस,
दुआ के पैर से चौखट नहीं सब लांघती बस,
बनाया नींद में हरगिज़ नहीं, बनाने वाले ने इश्क़ को,
दिलों में जल गई होगी चरागां, के लिख दिया संग दर्द को,
अगर ये दर्द सीने में हँसी बन जाए उसकी,
मैं सारी उम्र सह लूंगा ज़ख्म दिए उसके,
चलो एक आज फिर हम उसे कर जाएं हंसके,
के रोएगा दिल मेरा, आंसू सम्हल जाएंगे हल्के।
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
Author's Note
हर कविता के पीछे की छोटी-सी कहानीमेरे दादाजी को पुरानी फ़िल्में देखने का बहुत शौक़ था। बचपन में कई बार मैं भी उनके पास बैठकर फ़िल्में देख लिया करता था। कहानी पूरी समझ आए या न आए, लेकिन उनके साथ बैठकर उन पुरानी फ़िल्मों को देखना अपने-आप में अच्छा लगता था। उन्हीं फ़िल्मों में से एक थी—“पड़ोसन”।
भोला को अपने पड़ोस में रहने वाली बिंदु से मोहब्बत हो जाती है। बिंदु संगीत सीखती है और उसका गुरु मास्टर पिल्लई भी उसे पसंद करता है। भोला ख़ुद अच्छा गा नहीं पाता, इसलिए उसका दोस्त विद्यापति एक तरकीब निकालता है। भोला सामने से गाने का अभिनय करता है और पीछे से विद्यापति उसकी आवाज़ देता है।
बिंदु धीरे-धीरे भोला के क़रीब आने लगती है। लेकिन फिर एक दिन उसे इस राज़ का पता चल जाता है। उसे लगता है कि भोला ने उसके साथ धोखा किया है और दोनों के बीच सब बिगड़ जाता है। बात इतनी बढ़ती है कि बिंदु मास्टर पिल्लई से शादी करने के लिए तैयार हो जाती है। और यहीं आकर मुझे भोला के बारे में सोचने का मन हुआ।
जिस लड़की को वह इतने दिनों से चाहता था, जिसकी एक झलक के लिए वह इतने तमाशे करता रहा, अब उसकी शादी किसी और से होने वाली थी। वो सामने खड़ा होगा... बिंदु को देख रहा होगा... और शायद उसके पास कहने के लिए कुछ भी नहीं होगा। बस दिल में बहुत कुछ होगा। मैंने उसी पल को अपने हिसाब से सोचा।
अगर उस वक़्त भोला के दिल से कोई नज़्म निकलती, तो कैसी होती?
शायद वो बिंदु को रोकने की कोशिश करता। शायद कहता कि तुम मेरी ज़िंदगी का साहिल हो, तुम्हें देखकर ही मेरी राहें बनती हैं। शायद अपने दर्द को छिपाकर आख़िरी बार उसे हँसाना चाहता। और शायद यही सोचकर कहता—
“चलो एक आज फिर हम उसे कर जाएँ हँसके, के रोएगा दिल मेरा, आँसू सँभल जाएंगे हल्के।”बस, उसी ख़याल से मैंने ये कविता लिखने की कोशिश की है। बाक़ी फ़िल्म में आगे क्या होता है, वो कहानी भी कम दिलचस्प नहीं। विद्यापति और उसके दोस्त भोला के लिए एक आख़िरी तरकीब निकालते हैं। भोला के मर जाने का नाटक किया जाता है। बिंदु को जब उसकी मौत की ख़बर मिलती है, तो वह अपने दिल की बात छिपा नहीं पाती। वह टूट जाती है और भोला के पास पहुँचती है। और तभी भोला उठ बैठता है। बिंदु को एहसास हो जाता है कि वह भोला से ही मोहब्बत करती है। दोनों फिर एक हो जाते हैं और आख़िरकार उनकी शादी हो जाती है। और सबसे मज़ेदार बात—जिस मास्टर पिल्लई से बिंदु की शादी होने वाली थी, वही आख़िर में उनकी शादी में शहनाई बजाता दिखाई देता है। इतने साल बाद भी दादाजी के साथ देखी हुई वह पुरानी फ़िल्म मुझे याद है। और शायद इसी वजह से आज ये कविता भी आपके सामने है। नमस्कार, मैं Rishabh Bhatt। अगर आपने पड़ोसन देखी है, तो शायद इस नज़्म को पढ़ते हुए आपको भी भोला का वही पल याद आए। और अगर नहीं देखी, तो शायद अब इस कहानी को एक बार देखने का मन करे। कविता को पढ़िए, अपनी राय Comment में बताइए और अगर आपको लगे कि ये एहसास किसी और तक पहुँचना चाहिए, तो इसे Share ज़रूर कीजिए। और हां, हर Friday RishNova पर एक नई Writing आपका इंतज़ार करती है। ❤️
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