उर्दू नज़्में
Season–2मेरे दिल के रदीफ़ 🍁
ऐ मेरे दिल के रदीफ़
मेरी मुस्कराहटें उदासी में खो गई हैं,
इक लहक आई थी उनके मिलने से मुझे,
मगर जुबां की हर लफ़्ज़
अब सियाह रातों में खो गई है,
सहर सा था कुछ उनकी अल्फाजों में,
निकलती हुई हर गीत सुकून दे जाती थी,
अदाओं को छूके उसकी, मेरी नज़्म
गलियों गलियों में तराने गाती थी,
उन तरानों में मायूसी के सिवाए
अब कुछ भी नहीं है,
पहले गलतियों से सीख लेते थे हम,
अब तो जो ग़लत है, वो भी सही है
ऐसा क्या रम्ज़ था उनमें
कि भूल नहीं पाता हूँ,
इश्क़ फिर भी हुए कई ईशां से,
मगर उस चेहरे पर आज भी खो जाता हूँ।
किताब : मेरा पहला जुनूं इश्क़ आख़री
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
Author's Note
हर नज़्म के पीछे की छोटी-सी कहानीकुछ लोग हमारी ज़िंदगी से चले जाते हैं, लेकिन उनके जाने के बाद भी हमारी ज़िंदगी पहले जैसी नहीं हो पाती। शायद इसलिए नहीं कि हम उन्हें भूल नहीं सकते, बल्कि इसलिए कि उनके साथ हमारी अपनी कोई पुरानी शक्ल भी चली जाती है।
“मेरे दिल के रदीफ़” उसी बदलाव की नज़्म है। जैसे Tamasha में वेद को तारा के साथ सिर्फ़ एक रिश्ता नहीं मिलता, उसे अपने उस हिस्से की झलक भी मिलती है जिसे वह दुनिया से छिपाता रहा था। और फिर Rockstar का जनार्दन याद आता है। मोहब्बत उसके लिए सिर्फ़ ख़ुशी नहीं रहती, वह उसकी आवाज़ बन जाती है। दर्द आता है तो वही दर्द उसके गीतों में उतरता है। शायद यही वजह है कि किसी की मौजूदगी अक्सर हमारी मुस्कराहट तक बदल देती है।
फिर वही शख़्स दूर हो जाए तो सिर्फ़ रिश्ता नहीं टूटता। गीत सुनाई देना बंद हो जाते हैं। शब्द पहले जैसे नहीं लगते। और मुस्कुराने की वजहें कम नहीं होतीं, मगर मुस्कान में पहले वाली बात नहीं रहती। Ae Dil Hai Mushkil का अयान भी शायद इसी जगह कहीं खड़ा दिखाई देता है—मोहब्बत उसके साथ नहीं है, लेकिन उसकी मोहब्बत उसकी आवाज़ में रह जाती है। इस नज़्म में भी शायद वही बात है।
इश्क़ दोबारा हो सकता है। ज़िंदगी में कई चेहरे अच्छे लग सकते हैं। कई लोग आपके क़रीब आ सकते हैं। लेकिन कभी-कभी कोई एक चेहरा ऐसा होता है, जिसके सामने पहुँचते ही दिल अपने पुराने रास्ते पर लौट जाता है। और तब सवाल यह नहीं रहता कि “वो क्यों याद है?” सवाल बस इतना रह जाता है— “आख़िर उसमें ऐसा क्या था?”
नमस्कार, मैं Rishabh Bhatt। अगर आपने भी कभी महसूस किया है कि किसी के आने से आपकी ज़िंदगी में रंग बढ़ गए थे और उसके जाने के बाद वही दुनिया कुछ फीकी-सी लगने लगी, तो शायद ये नज़्म आपको अपनी लगे। अगर नज़्म दिल तक पहुँचे, तो Comment में अपनी बात ज़रूर लिखिए और इसे उस शख़्स तक Share कीजिए, जो शायद इन एहसासों को बिना समझाए समझ जाए।
और हां, हर Friday RishNova पर एक नई Writing आपका इंतज़ार करती है। ❤️
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