उर्दू नज़्में
Season–2पीर की हिदायत 🕊️
वो रुखसार यूं शबनम हो गई,
के मेरे आँखों की चमक मद्धम हो गई,
वो जिसका होना ही इरशाद था कोई,
बग़ैर सितम के भी सैकड़ों ग़म हो गई,
उसका इश्क़ था पीर की हिदायत,
बदलने से रास्तों के ज़ख्म हो गई,
मुसतफ़ा के ज़िंदगी भर की कमाई,
यूं अचानक चोरी की रकम हो गई,
गुलज़ार थी उसकी आँखें, गुलबहार जिस्म,
मौसमों के जैसे ढलते–ढलते कम हो गईं,
मुंतशिर घरों तक डाकिया पहुंच पाएगा क्या?
सुना है बग़ैर स्याही उनकी कलम हो गई,
ईमां की गहराइयों तक झांकके देखा सभी,
बिना फ़ूल के भी वो भरी मौसम हो गई,
ललक का क़त्ल खुद ही कर दिया मैंने,
बेवफ़ा जब मेरी सनम हो गई।
किताब : कसमें भी दूं तो क्या तुझे?
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
Author's Note
हर नज़्म के पीछे की छोटी-सी कहानीएक वक़्त था, जब मेरे फ़ोन की Gallery में किसी एक इंसान की लगभग दो हज़ार तस्वीरें और Videos थीं। सालों में धीरे-धीरे इकट्ठा की थीं। ज़्यादातर उसने ख़ुद भेजी थीं। कुछ ऐसे पल भी थे, जिन्हें मैंने बस अपने लिए सहेज लिया था। कभी उसकी नींद में खींची हुई तस्वीर, कभी कोई Blur Photo, कभी Video Call पर उसकी बेवजह-सी हँसी, तो कभी किसी Filter के पीछे छिपी उसकी मासूमियत। शायद उसे उनमें से कुछ तस्वीरें कभी पसंद न आतीं... लेकिन मेरे लिए वे सिर्फ़ तस्वीरें नहीं थीं, मेरी यादों का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा थीं।
फिर एक दिन सब कुछ बदल गया। जिस चीज़ को मैं अपनी सबसे अनमोल अमानत समझता था, उसी के लिए मुझ पर इल्ज़ाम लगाए गए। मुझसे कहा गया कि शायद मैं उन तस्वीरों का ग़लत इस्तेमाल कर सकता हूँ। उस पल सफ़ाई देने से ज़्यादा ज़रूरी मुझे उसका यक़ीन लगा। मैंने उसकी हर बात चुपचाप सुनी... और फिर बिना एक पल रुके, उसकी हर तस्वीर, हर Video, हर याद अपनी Gallery से हमेशा के लिए Delete कर दी।
सालों की जमा की हुई यादें... बस कुछ Seconds में मिट गईं। शायद उसी रात मुझे यह मिसरा मिला—
मुस्तफ़ा के ज़िंदगी भर की कमाई, यूँ अचानक चोरी की रकम हो गई।क्योंकि जब भरोसा टूटता है, तो सिर्फ़ रिश्ता नहीं टूटता... इंसान अपनी नीयत पर लगे इल्ज़ाम का बोझ भी बहुत देर तक ढोता है। "पीर की हिदायत" सिर्फ़ बेवफ़ाई की नज़्म नहीं है। यह उस दर्द की कहानी है, जब आपकी सबसे पाक मोहब्बत पर ही शक कर लिया जाए। जब आपकी सबसे कीमती यादें, किसी और की नज़र में सबूत बन जाएँ। अगर आपने कभी किसी को पूरी सच्चाई से चाहा है... तो शायद आप समझ पाएँगे कि कुछ चीज़ें Delete तो हो जाती हैं... लेकिन दिल की Memory से कभी Delete नहीं होतीं। अगर “पीर की हिदायत” आपके दिल तक पहुँचे, तो अपनी बात Comment में ज़रूर बताइए और इसे अपने अपनों के साथ Share कीजिए। और ऐसी ही नई Writings के लिए हर Friday RishNova पर ज़रूर आइए। हर Friday एक नई Writing आपका इंतज़ार करती है। ❤️
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