विभूतियाँ
Season–1विश्वेश्वरैया — भारतीय इंजीनियरिंग के पथप्रदर्शक
वो भी तो एक साधारण बच्चा था,
गाँव की पगडंडियों पर चलता,
शायद किसी ने सोचा भी न होगा,
कि एक दिन पूरा देश उसे याद करेगा।
गरीबी उसकी साथी थी,
पर सपनों ने कभी हारना नहीं सीखा।
पुस्तकों से जो दोस्ती की,
वो दोस्ती ही उसकी ताक़त बन गई।
पुणे की गलियों से निकला,
सिविल इंजीनियरिंग का एक चमकता नाम।
हर पत्थर, हर ईंट, हर दीवार में,
उसकी मेहनत की गूंज सुनाई देती थी।
कृष्णराज सागर का पानी कहता है—
“मेरा अस्तित्व उसी की वजह से है।”
हैदराबाद की बाढ़ ठहरकर बोलती है—
“उसने ही मुझे थामा था।”
लोहे के दरवाज़ों की तकनीक में,
उसकी दूरदर्शिता चमकती है।
मैसूर की धरती गवाही देती है—
“उसने मुझे आधुनिक रूप दिया।”
सम्मानों से वो भरा गया,
भारत रत्न और “Sir” की उपाधि पाई।
पर असली पहचान ये थी कि,
उसने अपना जीवन देश को दे दिया।
सदीभर जीकर चला गया वो,
पर हर 15 सितम्बर उसकी धड़कन लौट आती है।
हर अभियंता जब कोई सपना गढ़ता है,
तो उसमें विश्वेश्वरैया की रूह बसती है।
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
कविता के पीछे के भाव
विचारों की नींव पर खड़ा एक भारतएक इंजीनियर नहीं, भारत के सपनों का शिल्पकार थें M. Visvesvaraya। एक साधारण परिवार से निकलकर, अपने ज्ञान और अनुशासन के बल पर उन्होंने वह कर दिखाया, जो उस समय लगभग असंभव माना जाता था। कविता की शुरुआती पंक्तियां जानबूझकर बहुत सरल रखी गई हैं —
वो भी तो एक साधारण बच्चा था…क्योंकि अक्सर महानता की शुरुआत साधारण परिस्थितियों से ही होती है। गरीबी, संघर्ष और सीमित साधन… लेकिन भीतर कुछ बड़ा करने की आग। विश्वेश्वरैया का जीवन केवल इंजीनियरिंग की कहानी नहीं है। वह उस सोच की कहानी है, जहां ज्ञान को राष्ट्रनिर्माण का माध्यम माना जाता है। जब कविता में Krishna Raja Sagara का उल्लेख आता है, तो वह केवल एक बांध नहीं रह जाता। वह उस दूरदर्शिता का प्रतीक बन जाता है, जिसने आने वाली पीढ़ियों के लिए जल, ऊर्जा और विकास का मार्ग तैयार किया। इसी तरह Hyderabad की बाढ़ नियंत्रण प्रणाली और आधुनिक इंजीनियरिंग में उनका योगदान यह दिखाता है कि वे केवल संरचनाएं नहीं बना रहे थे… वे लोगों का भविष्य सुरक्षित कर रहे थे।
लोहे के दरवाज़ों की तकनीक…यहां कविता उनके innovative floodgate system की ओर संकेत करती है, जिसने उन्हें विश्वस्तरीय पहचान दिलाई। लेकिन मेरे लिए इस कविता का सबसे महत्वपूर्ण भाव अंत में आता है —
हर अभियंता जब कोई सपना गढ़ता है, तो उसमें विश्वेश्वरैया की रूह बसती है।क्योंकि कुछ लोग समय के साथ इतिहास नहीं बनते… वे प्रेरणा बन जाते हैं। Engineers' Day हर साल उनके जन्मदिन पर मनाया जाता है। लेकिन सच कहूं, विश्वेश्वरैया केवल एक दिन में याद किए जाने वाले व्यक्ति नहीं हैं। वे उस विचार का नाम हैं, जो कहता है कि देशभक्ति केवल युद्धभूमि में नहीं, कभी-कभी नक्शों, पुलों, मशीनों और सपनों में भी दिखाई देती है। ⚙️ अगर ये शब्द आपको connect कर पाए हों, तो नीचे comment में अपनी राय या अपना अनुभव ज़रूर लिखिए। 💬 और अगर आपको लगा कि ये किसी अपने तक पहुँचना चाहिए, तो बिना सोचे share कर दीजिए। ❤️ साथ ही हर Friday RishNova पर कुछ नया पढ़ने ज़रूर आइए... अगला ब्लॉग शायद आपका favourite बन जाए। ✨
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