Manthan 🪷
आजकल की भागदौड़ में हम दुनिया से तो जुड़ जाते हैं, लेकिन खुद से दूर हो जाते हैं। 'मंथन' कोई आम कविताओं की सीरीज़ नहीं है, बल्कि यह आपके अपने विचारों और सपनों से मिलने का एक ज़रिया है। कविता आपको लाइफ के किसी न किसी मोड़ पर खुद से कनेक्ट करना सिखाएगी।
यह सीरीज़ आपके लिए क्यों है?
यह आपको अपने अंदर की आवाज़ सुनने में मदद करेगी, जहाँ निराशा होगी, वहाँ यह उम्मीद की एक नई लौ जलाएगी,जब आप खुद को अकेला पाएंगे, तब ये शब्द आपके सबसे अच्छे दोस्त बनेंगे और जहाँ कन्फ़्यूज़न होगा, वहाँ यह आपको क्लेरिटी की तरफ ले जाएगी।
चाहे बात सीजन 1 के स्पिरिचुअल थॉट्स की हो या आने वाले सीजन्स के सेल्फ-रियलाइजेशन की—मंथन का सिर्फ एक ही मोटिव है: आपको आपके अंदर की असली ताकत और शांति से मिलाना।
अगर आप कविताओं में सिर्फ राइमिंग नहीं, बल्कि लाइफ की सच्ची धड़कन महसूस करना चाहते हैं, तो यह सफर आपके लिए ही है।आइए, मिलकर शब्दों के इस कूल और डीप सफर पर चलते हैं! 🚀
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Season–1
रश्मियां आमोद की
जब चारों तरफ कड़वाहट और क्रोध की रजनी (अंधेरा) हो, तब अपने भीतर उम्मीद की 'रश्मियां' कैसे जगाएं?
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कौन हूं मैं?
आधुनिक विज्ञान या संस्कृति की धरोहर? क्या आप जानते हैं कि आज की युवा पीढ़ी असल में क्या है?
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बंधन मुक्ति
मोह का चक्रव्यूह और प्रज्ञा का काल—एक ऐसी कविता जो आपके अंतर्मन के विवेक को जगा देगी...
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समय आ गया है परिवर्तन का : प्रार्थना
राख बनकर बिखरना नहीं, बल्कि तप कर सोने की तरह चमकना है—क्योंकि अब समय आ गया है परिवर्तन का...
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पथप्रदर्शक कर्त्तव्य
जब संघर्ष थमने लगे, तब अपने कर्तव्य को याद करो, क्योंकि वही तुम्हें तुम्हारी मंजिल तक पहुँचाएगा...
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जीवन में काली
जब एक काला पल पूरी हँसती-खेलती ज़िंदगी का रंग छीन ले, तब उस बिखराव से खुद को वापस कैसे संभालें?
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अपरिचित राह ये
जब मोह अपनी तरफ खींचे और डर पैर पीछे धकेले, तब अपने भीतर की शक्तियों का ध्यान करो और चट्टान बन जाओ...
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दीपशिखा
क्या आपके भीतर भी दुनिया के कड़वे अनुभवों और दुखों को सोखकर, उन्हें खूबसूरत शब्दों में बदलने का हुनर है?
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चंदन की चिता
जब एक तरफ चिता जल रही हो और दूसरी तरफ़ आवाज़ दफ़्न हो चुकी हो, तब कोई 'मैं प्रीत हूँ तेरा' कहकर किसे पुकार रहा है?
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कर्मयोग
आँखों में सपनों की चमक और कदमों में संगीत लिए, क्षितिज की ऊंचाइयों को छूने की एक आध्यात्मिक यात्रा...
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Season–2
हे कर्तव्य! यही क्षण है स्मरण आने का
पीर भले ही पर्वत जैसी हो और रास्ते मुश्किल, पर यही वो पल है जब तुम्हें अपना हर दायित्व निभाना है...
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छोडूं यदि संघर्ष को
जब कदम रुकने का मतलब सिर्फ पतन हो, तब बिना ठहरे सागर जैसी भूख लेकर आगे कैसे बढ़ें?
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पथ मेरा कौन?
हैं राह कई, पथ मेरा कौन? क्या आपका मन भी ज़िंदगी के दो मोड़ों पर आकर इस गंभीर कशमकश में फंसा है?
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स्वर्ग की ओर
जब इंसान 'स्वप्न के औज़ार' लेकर सीधे स्वर्ग और ब्रह्मांड को चुनौती देने निकले, तो क्या वो सृष्टि के रहस्य सुलझा पाएगा?
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मैं शून्य मात्र हूँ
सृष्टि की इस माया और इंसानी भ्रम को तोड़ती एक ऐसी गहरी कविता, जो आपके शून्य हृदय को ईश्वर की भक्ति से भर देगी...
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Rishabh Bhatt
कभी-कभी लगता है कि शब्द हम नहीं लिखते, बल्कि शब्द हमें चुनते हैं। Manthan Series मेरे लिए ऐसी ही एक यात्रा है—जहाँ हर कविता किसी कल्पना से नहीं, बल्कि जीवन, विश्वास, आत्ममंथन और भीतर उठते अनगिनत प्रश्नों से जन्म लेती है।
इस प्लेलिस्ट में Manthan के सभी Seasons की कविताएँ एक साथ संकलित हैं। कुछ रचनाएँ मेरी किताब "ये आसमा तेरे कदमों में है" से ली गई हैं, जबकि कई कविताएँ इसी श्रृंखला के लिए नई और विशेष रूप से लिखी गई हैं। हर कविता का उद्देश्य केवल पढ़ा जाना नहीं, बल्कि महसूस किया जाना है।
मेरी अधिकांश कविताएँ Amar Ujala Kavya पर भी प्रकाशित हैं,
जहाँ लाखों पाठकों का स्नेह लगातार मिलता रहा है। मेरी प्रकाशित पुस्तकों में Dev Vandana, Mera Pehla Junoon Ishq Aakhri, और Ye Aasma Tere Qadmon Mein Hai शामिल हैं, जो Amazon, Flipkart, Notion Press, Pothi.com सहित दुनिया भर के अनेक प्लेटफ़ॉर्म्स पर उपलब्ध हैं।
मैं, ऋषभ भट्ट — पेशे से एक Engineer, लेकिन दिल से Author और Poet हूँ। मेरे लिए कविता केवल साहित्य नहीं, बल्कि आत्मा और विचारों के बीच होने वाला एक शांत संवाद है।
यदि इन पंक्तियों में आपको अपने जीवन की कोई झलक, कोई प्रेरणा, कोई प्रार्थना या कोई नई दिशा मिल जाए, तो यही Manthan Series का सबसे बड़ा उद्देश्य है।
