Buddham Sharanam Gacchami 🪷 – Rishabh Bhatt | Vibhutiyan

विभूतियाँ

Season–1

बुद्धम शरणं गच्छामि

मुस्कुराती हर शाम तू, ओ चाँदनी— मुझको बता क्यों मौन है? मेरे हृदय की प्यास में, सागर बनी इक बूँद सी, उठती लहर अज्ञान की, तुम ज्ञान के शाखा अमर, मेरी उमर तुझमें जिए, मुझको बता तू कौन है? कुछ रुनसुनाती रंग में, बन के तरंग तुम चल रहे, फिर छल रहा क्यों जग मुझे? तुम कल रहे, तुम कल रहे। तुम साधना की शक्ति हो, सन्दर्भ के तुम भक्तित हो, तुम ज्ञान के प्रारम्भ हो, अनन्त के तुम अंत हो, तुम चेतना के आदि हो, तुम योग के अनन्त हो। तेरे चरण में शीष ले, तुमको नमामि, तुमको नमामि, तुमको हृदय आशीष दे, बुद्धम शरणं गच्छामि। 🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿 ✒️ Poet in Hindi | English | Urdu 💼 Engineer by profession, Author by passion

Follow RishNova

Where Emotions Turn Into Stories.

Follow

Follow On Aamar Ujala Kavya

A World Written in Feelings.

Follow

इन पंक्तियों में छिपा बुद्ध का मार्ग 🪷

मौन, बुद्ध और आत्मा की यात्रा
जब संसार का कोलाहल मन को थका देता है, जब प्रश्न बहुत होते हैं पर उत्तर कहीं नहीं मिलते, तब मन किसी ऐसी शांति को खोजने लगता है… जो शब्दों से परे हो। Gautama Buddha की कथा भी इसी खोज से आरम्भ होती है। एक राजकुमार, जिसके पास वैभव था, राज्य था, सुख था… फिर भी भीतर एक रिक्तता थी। उन्होंने देखा — रोग, वृद्धावस्था और मृत्यु। और पहली बार समझा कि संसार केवल उत्सव नहीं है। दुःख भी सत्य है। यहीं से सिद्धार्थ का बुद्ध बनने तक का सफर शुरू हुआ। इस कविता में वही तलाश दिखाई देती है। यहां कवि किसी व्यक्ति से नहीं, एक चेतना से प्रश्न कर रहा है।
ओ चाँदनी— मुझको बता क्यों मौन है?
ये मौन केवल चाँदनी का नहीं है। ये उस सत्य का मौन है, जो शब्दों में नहीं समाता। कविता में बार-बार अज्ञान और ज्ञान का द्वंद्व दिखाई देता है। एक ओर मन की बेचैनी है, दूसरी ओर बुद्ध की स्थिरता।
उठती लहर अज्ञान की, तुम ज्ञान के शाखा अमर…
यही बुद्ध का सार था। उन्होंने संसार से भागने का मार्ग नहीं दिया, बल्कि स्वयं को समझने का मार्ग दिया। इस कविता में “चाँदनी” केवल प्रकृति नहीं है। वह करुणा है, वह शांति है, वह बुद्ध की वह दिव्य उपस्थिति है, जो अंधकार में भी प्रकाश जैसी लगती है। जब कवि लिखता है —
तुम साधना की शक्ति हो, अनन्त के तुम अंत हो…
तब वह बुद्ध को देवता की तरह नहीं, बल्कि उस चेतना की तरह देख रहा है जो मनुष्य को भीतर से मुक्त करती है। और अंत में —
बुद्धम शरणं गच्छामि…
यह केवल एक प्रार्थना नहीं है। यह अहंकार से शांति की ओर जाने का निर्णय है। एक ऐसा क्षण, जहां मन पहली बार स्वयं के अंदर झुकता है। 🪷 •💬 अगर आपको यह कविता अच्छा लगा हो, तो नीचे कमेंट में अपनी राय जरूर बताइए। •📲 इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ भी शेयर कीजिए। •📚 ऐसी ही कविताएँ, कहानियाँ और ब्लॉग पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट से जुड़े रहिए। ✨ •🌸 आपके स्नेह के लिए धन्यवाद — Team RishNova
🪔 युगपुरुषों के अनन्त पदचिह्न
Milarepa : Glani Se Nirvaan Tak 📿
Ek paapi se siddh yogi banne ki amar gatha
Read
Rana ki Talwaren ⚔️
The roar of Mewar lives forever
Read
Main Mughalon Ke Khoon Ka Pyaasa Hoon ⚔️
Ek yoddha ki dahad, jo itihaas hila de
Read
Chhatrapati Shivaji Maharaj ⚔️
The Lion of Swarajya
Read
Nambi : The Rocketry 🚀
Truth. Science. Sacrifice.
Read
Adhura Samay ⏳
The genius who saw magic in mathematics
Read
Vibhutiyan
Veerta, gyaan aur gaurav ki amar gathayein
Read

🌳 Explore My Writing Universe

Har branch ek nayi duniya... Poetry, emotions, nazmein, stories aur zindagi ke ehsaas.

RishNova

Poetry • Stories • Emotions • Thoughts • Human Feelings
❤️

Aashiqon Ki Gali Me

Ishq, heartbreak aur mohabbat ke adhure ehsaason se bhari premium poetry series.

Read Series →
🌙

Urdu Nazmein

Dil ko choo lene wali Urdu kavitaayein aur soulful nazmein ek cinematic andaaz me.

Read Series →

Manthan

Self-discovery, deep emotions aur real thoughts ka perfect blend.

Read Series →
🕉️

Divya Bhakti Sangrah

Bhakti, shanti aur spiritual vibrations se bhari devotional poetry collection.

Read Series →
🎭

Sanatya

Sanatan culture, divine stories aur spiritual emotions ka beautiful reflection.

Read Series →
🪔

Utsav Diary

Festivals, traditions aur Indian emotions ko celebrate karti poetic diary series.

Read Series →

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.