विभूतियाँ
Season–1लौह पुरुष
राधेय के कवच-कुण्डल,
अर्क की उसा तेज उज्जवल,
वो अमर आत्मा, आत्मा में बसें,
वो प्रचण्ड धर्म परमात्मा में बसें,
इतिहास कर्मों का गुणगान करे,
रजनी में दीपक सा शान धरे,
बहते मारुत की चाल लिए,
अवनी गर्वित ऐसे लाल दिए,
स्वराज्य करे वर्षों वंदन,
बिखरे तारों के बंधन,
उदयित जन की नीदों में,
राग बने कोयल की गीतों में,
हर पोथी में आधार धरें,
जीवित लौह पुरुष श्रृंगार बनें।
किताब : ये आसमां तेरे क़दमों में है
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
सरदार वल्लभभाई पटेल स्पेशल 🛡️
लौहपुरुष की लौ 31 अक्टूबर 1875 को जन्मे सरदार वल्लभभाई पटेल भारत के उन महान नेताओं में से एक थे, जिन्होंने देश को एकजुट रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई। उन्हें “लौहपुरुष” कहा जाता है, क्योंकि उनका इरादा और देश के प्रति समर्पण बहुत मजबूत था। ✨
आजादी के बाद भारत कई छोटी-बड़ी रियासतों में बंटा हुआ था, लेकिन सरदार पटेल ने 562 से ज्यादा रियासतों को एक साथ जोड़कर अखंड भारत बनाने का काम किया।उनका यह योगदान हमेशा इतिहास में याद रखा जाएगा। 🇮🇳
15 दिसंबर 1950 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा, लेकिन उनके विचार, उनका साहस और देशभक्ति आज भी हर भारतीय को प्रेरित करते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि एकता, ईमानदारी और देशप्रेम सबसे बड़ी ताकत होती है। ❤️
आज उनकी जयंती पर आइए, हम सभी उनके विचारों को याद करें और अपने देश के प्रति सम्मान और प्रेम को हमेशा बनाए रखें। ✨
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बहुत सुन्दर काव्य सरदार पटेल का
ReplyDeleteशत् शत् नमन सरदार बल्लभ भाई पटेल
ReplyDeletevery nice poetry
ReplyDeleteSundar kavita
ReplyDeletevery nice
ReplyDeleteBahut sundar
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteSarder Patel amar rhe
ReplyDeleteBahut achcha poem
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