Parallel Lives : Season - 1
Main Ek Gaon Mein Aaya Hoon 🌾
शहर की वादियों से,
बड़ी मुश्किल से निकल पाया हूँ,
चैन की सांस लेने,
मैं एक गांव में आया हूँ।
जैसे आंखों को तारें चुभने लगे हैं,
चकाचौंध से आसमान धुंधले पड़े हैं,
उन बनावटी रौशनी से कहीं दूर,
चांद से निगाहें मिलाया हूँ,
चैन की सांस लेने,
मैं एक गांव में आया हूँ।
सड़कों पे गाड़ियों की मारा–मारी,
पक्षियों से सूनी हर एक डारी,
उन हैरतंगेज आवाज़ों से दूर,
चिड़ियों की चहचहाहट सुन पाया हूँ,
चैन की सांस लेने,
मैं एक गांव में आया हूँ।
रंग–बिरंगी दीवारें,
पर अफनाहट की एहसासे,
खेतों खलिहानों में लेटी,
मन शांति भरी कुछ सांसें,
हां! बड़े दिनों बाद,
खुले आसमान के नीचे सो पाया हूँ,
चैन की सांस लेने,
मैं एक गांव में आया हूँ।
शहर की वादियों से,
बड़ी मुश्किल से निकल पाया हूँ,
चैन की सांस लेने,
मैं एक गांव में आया हूँ।
किताब : ये आसमां तेरे कदमों में है
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
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