प्रेयसी : Season–1
भड़ास 💥
प्रेम तुमसे ही मैंने किया,
घृणा भी उतनी ही है तुमसे 🖤
इश्क़ की ये भड़ास
हर पल मेरी रगों में उबल रही है 🔥💢
आख़िरकार तुमने मेरा साथ न देकर,
मुझे ही गुनहगार बना दिया ⚖️💔
कुछ ही क्षणों में ⏳
तुम्हारे हृदय का सारा प्रेम,
मेरे लिए विष बनकर निकलने लगा ☠️
उस क्षण को
मैं चाहकर भी भूल नहीं सकता 🌫️
क्योंकि जिससे मैंने
निस्वार्थ प्रेम किया, 💞
वो स्वार्थ के लिए बोली —
"तुमने क्या किया है मेरे लिए?" 💬💔
इसका उत्तर
मेरे पास आज भी नहीं है 🕯️
काश मैं प्रेम को दिखा पाता,
कि मैंने तो बस
प्रेम ही किया… 🌙💫
किताब : मैं उसको ढूढूंगा अब कहां?
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
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