Divya Bhakti Sangrah - Siya Ram Special
Season 1
मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम
तेज धर्म मूर्ति के आभा अर्क समान,
मर्यादित पुरुषार्थ से है त्रिलोक ये प्रकाशमान,
न समान पंचतत्व में कोई रघुवर सा नाम,
सृष्टि के सृजनकर्ता, जय रघुनंदन श्री राम।
ये मन भर हर्ष से खिले रजनी में आश मिले,
जीवन को मूल मिले जो कौशल्यानंदन के चरणों की धूल मिले,
शरणों में ये तन करता रहे वन्दन,
जय रघुपति राघव दशरथनन्दन।
हैं गुण ज्ञान कोश मन भावन पावन चरित्र,
धर्म, कर्म के स्तम्भ करें गुणगान गंगा पवित्र,
गुणगान करें सुर, नर, मुनि, जन
भजता रहे ये मन जय रघुकुल भूषण राजीव नयन।
चला जा रहा सुन जिस गाथा को अविरल,
अज्ञेय बसा क्या उसमें जो नव्य लगे हर पल,
आदर्श भरे जीवन में दे जीवन को संबल,
निर्मल करता तन, मन जय सियापति रघुनंदन।
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कविता का भावार्थ
यह कविता भगवान श्रीराम के उस आदर्श व्यक्तित्व को नमन करती है, जो आज भी हर युग में सत्य, धर्म और मर्यादा का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है।
कविता में श्रीराम के तेज, उनके पवित्र चरित्र और मर्यादित जीवन का वर्णन किया गया है। उन्होंने हर रिश्ते, हर कर्तव्य और हर परिस्थिति में धर्म का पालन किया। यही कारण है कि उनका जीवन आज भी संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
आगे बताया गया है कि श्रीराम का स्मरण मन में शांति, आशा और आनंद का संचार करता है। उनके चरणों की धूल भी जीवन को सही दिशा देने वाली मानी गई है। मन की यही कामना है कि जीवनभर उनके प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण बना रहे।
कविता में उनके ज्ञान, गुण और पावन चरित्र की महिमा का भी सुंदर वर्णन किया गया है। उनका जीवन सिखाता है कि शक्ति से बड़ा धर्म होता है और विजय से बड़ा सत्य के मार्ग पर अडिग रहना। इसलिए देवता, ऋषि और सामान्य जन सभी उनके गुणों का गुणगान करते हैं।
अंत में यह भाव उभरकर आता है कि श्रीराम की गाथा कभी पुरानी नहीं होती। हर बार उसे सुनने या पढ़ने पर कोई नया संदेश और नई प्रेरणा मिलती है। उनका आदर्श जीवन मनुष्य को कठिन समय में भी साहस देता है और सत्य, प्रेम तथा मर्यादा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
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Very very nice
ReplyDeleteThank you
DeleteGood poem 👌👌
ReplyDeleteThank you
Deletevery very nice poetry 😗
ReplyDeleteJai Shree Ram🙏🙏🙏🙏🙏🙏
ReplyDeleteRam ram jai shree ram
ReplyDeleteVery nice poetry
ReplyDeleteBeautiful poem
ReplyDeleteJhakas
ReplyDeleteBahut sundar
ReplyDeleteJai Shree Ram
ReplyDeleteJai jai shree ram
ReplyDeleteBahut mast
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