RishNova Presents | From The Book : Kasmein Bhi Doon Toh Kya Tujhe?
ज़िंदगी बेशकीमती है
हवाई जहाज़ बादलों को चीरते हुए अपनी मंज़िल की ओर बढ़ रहा था। ज़्यादातर यात्री या तो सो चुके थे या अपने-अपने मोबाइल और किताबों में खोए हुए थे।
खिड़की वाली सीट पर बैठा एक युवक लगातार सामने की सीट को देखे जा रहा था। वहाँ एक मशहूर गायक और संगीतकार बैठे थे, जिनके गीतों ने न जाने कितने टूटे हुए दिलों को सहारा दिया था। उनकी आवाज़ में ऐसा दर्द था, जिसे सुनकर लगता था कि हर लफ़्ज़ किसी अधूरी मोहब्बत से जन्मा है।
युवक कई बार उनसे बात करने की हिम्मत जुटाता, लेकिन फिर रुक जाता। करीब आधे घंटे बाद गायक ने पानी की बोतल उठाई और अनायास ही उसकी नज़र युवक से मिली। युवक ने हल्की सी मुस्कान दी। जवाब में गायक भी मुस्कुरा दिए। बस, यही एक पल था जिसने झिझक तोड़ दी। युवक अपनी सीट से उठा, उनके पास गया और अदब से बोला—
अ
आशिक़
एक सवाल पूछूं सर?
उस्ताद
हां, पूछो।
उ
अ
आशिक़
क्या आपने मोहब्बत की है?
उस्ताद
नहीं।
उ
अ
आशिक़
मैं नहीं मानता। आपके गानों में, आपकी आवाज़ में जो दर्द है, उसे मैं ही नहीं — पूरी दुनिया महसूस कर सकती है। वो दर्द बिना मोहब्बत के मुमकिन ही नहीं हो सकता।
उस्ताद
इतना भरोसा है तुम्हें अपनी बातों पर?
उ
अ
आशिक़
खुद से भी ज्यादा।
उस्ताद
इसकी वजह क्या है?
उ
अ
आशिक़
मोहब्बत… वो जिसे मैंने सिर्फ जिया ही नहीं, बल्कि उसके साथ जीने की ख्वाहिश भी खो दी। अब इस ज़िंदगी से कोई एक्सपेक्टेशन नहीं रहा।
उस्ताद
मोहब्बत के जाने का दर्द ज़िंदगी को क्यों?
उ
अ
आशिक़
मैं समझा नहीं।
उस्ताद
अभी तो तुमने खुद कहा — जीने की ख्वाहिश नहीं रही, कोई उम्मीद नहीं रही। भला किसी इंसान की गलतियों की सज़ा पूरी ज़िंदगी को क्यों देना?
उ
अ
आशिक़
सच कहते हैं लोग, ये इश्क़ समझ से बाहर है। यही तो वजह है कि उसके आने से मैंने खुद को इतना बदल लिया था कि अब उसके बिना जीना… जीने की सबसे बड़ी चुनौती लगता है।
उस्ताद
तो एक बार फिर से बदलने की कोशिश क्यों नहीं करते?
उ
अ
आशिक़
हर वक्त की है मैंने। यूं लगता है जैसे किस्मत की स्याही ने उस पन्ने पर हार ही लिख दी हो, जिसे मोहब्बत ने कभी सजाया था। अधूरी रह गई वो हर चीज़, जो मैंने इस इश्क़ के लिए की।
उस्ताद
मुझे पता है आगे क्या बोलोगे। यही न — एक दिन वो आई, अपना सारा रोब झाड़ कर चली गई। आवारा, मवाली और न जाने क्या-क्या कहा। वही लड़की, जिसने पहले सिर्फ तारीफ की थी।
उ
अ
आशिक़
हां… और एक वो सवाल, जिसका जवाब मैं भी नहीं दे सका।
उस्ताद
यही न — “क्या किया तुमने मेरे लिए?”
उ
अ
आशिक़
हुबहू यही लाइन। लेकिन आपको कैसे पता?
उस्ताद
अभी तुमने पूछा था न, मुझे मोहब्बत हुई है या नहीं। अब जवाब खुद ढूंढ लो।
उ
अ
आशिक़
तो क्या इस सवाल का कोई जवाब नहीं बनाया उस खुदा ने?
उस्ताद
हर चीज़ खुदा से ही पूछोगे तो जवाब कैसे मिलेगा, मेरे दोस्त। एक बार खुद से पूछो। क्योंकि खुद से बेहतर जवाब कोई नहीं दे सकता। कोई भी नहीं।
उ
अ
आशिक़
कोशिश की थी मैंने। उसके बदले में मिला — तड़प। आंखों में चुभती तारों की चमक। रात के अंधेरे में काले पड़ते जीने के रंग। और ये एहसास कि मौत के लिए भी हिम्मत चाहिए — ये मेरी सबसे बड़ी खोज थी।
उस्ताद
कितने करीब से देखा है इस मौत को?
उ
अ
आशिक़
उतना कि सांस भरने के लिए ऑक्सीजन मास्क का सहारा लेना पड़ा था। उस दिन समझ आया — ये ज़िंदगी कितनी अनमोल है। शायद बड़ी किस्मत से मिली है।
तो क्यों किसी के लिए इस जिस्म को तकलीफ देना? क्यों चाहने की आस में उन पलों को खोना, जो मुट्ठी से फिसलती रेत की तरह एक बार गिर जाएं तो कभी वापस नहीं आते? क्यों किसी बात का इतना इल्म रखना, जो सिर्फ दिल को दर्द दे? और सबसे बड़ी बात — जो आपको छोड़कर जा चुका है, उसे आपके इस आशिकी के पागलपन से कोई फर्क नहीं पड़ता।
उस्ताद
मुझे लगता है अब मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं। मेरे सारे जवाब तुम खुद ही दे चुके हो। आख़िर में बस इतना ही कहना चाहूंगा — उन लोगों से फर्क नहीं पड़ना चाहिए, जिनका मकसद ही आपको सारी उम्र तड़पाना हो। ज़िंदगी बेशकीमती है। अकेले जियो। खुलकर जियो।
उ
"जिसे आपके दर्द से कोई फर्क नहीं पड़ता, उसके लिए अपनी ज़िंदगी खोना नहीं; अपनी ज़िंदगी को फिर से जीना ही सबसे बड़ी जीत है।" – ऋषभ भट्ट
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