20,000 Ka Lehnga 👗 – Rishabh Bhatt | Tales & Talks

RishNova Presents | From The Book : Kasmein Bhi Doon Toh Kya Tujhe?

20,000 का लहँगा

एक रईस आदमी से एक दिन एक अजनबी की मुलाकात होनी थी। रईस सिर्फ पैसे से नहीं, मोहब्बत और तजुर्बों से भी रईस था। और अजनबी… वो अपनी माशूका के इश्क़ में खुद को भी भूल चुका था। कुछ दिनों पहले अजनबी अपनी माशूका के साथ सिंगापुर के एक शॉप में गया था। वहां उसकी माशूका को एक लहंगा पसंद आ गया। कीमत थी — 20,000 डॉलर। और मार्केट में उस लहंगे का बस एक ही सेट मौजूद था। जब अजनबी उसे लेने गया तो पता चला — कुछ ही देर पहले किसी रईस ने वो लहंगा खरीद लिया। लहंगा पैक होकर डिलीवरी के लिए निकल चुका था। लहंगा तो नहीं मिला… लेकिन उस रईस आदमी का पता मिल गया — भारत के एक शहर का। अपनी माशूका की खुशी के लिए अजनबी उस रईस के घर पहुंच गया।

दृश्य – 1

शाम • रईस का घर • ड्रॉइंग रूम

अजनबी
मॉर्निंग सर!
रईस
मॉर्निंग। पर कौन हो तुम?
अजनबी
मैं वही हूं जिसने आपको कल कॉल किया था। लहंगे के लिए… वो बीस हजार वाला।
रईस
ओह, तुम वही हो?
अजनबी
जी। मुझे वो लहंगा मेरी गर्लफ्रेंड के लिए चाहिए।
रईस
ठीक है… तुम बता चुके हो। बात प्यार की है, इसलिए मैं वो लहंगा तुम्हें देने के लिए तैयार हूं। चलो, मेरे पीछे-पीछे आओ।

दृश्य – 2

सुनहरी रोशनी • लग्ज़री हाउस के अंदर • नायाब लहंगों की गैलरी

अजनबी उसके पीछे चल पड़ा। जैसे-जैसे वो आगे बढ़ रहा था, उसकी आंखें हैरान होती जा रही थीं। घर नहीं… जैसे कोई शाही प्रदर्शनी हो। चारों ओर लहंगे ही लहंगे। दुनिया का हर नायाब डिज़ाइन, हर रंग, हर कारीगरी… जैसे सब यहीं जमा हो। करीब दस मिनट चलने के बाद आखिरकार उसकी नजर उसी लहंगे पर पड़ी — वही 20,000 डॉलर वाला।
अजनबी
सर, वो लहंगा वहां है।
रईस
पहचान गए?
अजनबी
मेरी आंखें जो एक बार देख लेती हैं, वो हमेशा के लिए याद रखती हैं।
रईस
अच्छी बात है। मगर दिल के मामलों में संभलकर रहना, मेरे दोस्त। एक वक्त के बाद यही यादें… मौत से भी ज्यादा तकलीफ देती हैं। याददाश्त ही जिंदगी के लिए घुटन बन जाती है।
अजनबी
मैं समझा नहीं… आप किस बारे में कह रहे हैं?
रईस
कुछ नहीं। तुम अपना लहंगा लो और जाओ।
अजनबी
सर… एक सवाल है। पहले उसका जवाब देंगे?
रईस
मुझे पता है तुम्हारा सवाल क्या है। और उसका जवाब देने का कोई मतलब नहीं।
अजनबी
फिर भी जानना चाहता हूं। इतने सारे लहंगों का आप क्या करेंगे? दुनिया का हर नायाब लहंगा आपके पास है। क्या आप कोई मॉल खोलने वाले हैं? या… कोई और वजह है?
रईस (हल्की मुस्कान के साथ)
मोहब्बत है इनके पीछे। और हां, तुम सही थे। मैंने ये किसी शॉप के लिए नहीं खरीदे। ये सारे लहंगे… मेरी मोहब्बत के लिए हैं।
अजनबी
कहां हैं वो? क्या मैं उनसे मिल सकता हूं?
रईस
वो बहुत किस्मत वाली होंगी जिन्हें आप जैसा साथी मिला। मैं तुम्हें उससे नहीं मिला सकता। सालों से उसका इंतज़ार कर रहा हूं… और खुद उससे मिल नहीं सका।
अजनबी
क्या मतलब? तो ये लहंगे किसके लिए? और वो कहां गईं?
रईस
वो मुझे छोड़कर चली गई। आज तक उसके जाने की वजह नहीं जान पाया। फिर भी दिल में उम्मीद थी… कि एक दिन लौटेगी। जब उसे मेरी मोहब्बत का एहसास होगा। रिलेशनशिप में थी तो उसने मुझसे एक वादा लिया था — हमारी शादी में उसे बीस हजार का लहंगा दिलाऊंगा। फिर वो चली गई। मैं वो लहंगा दे नहीं सका। उस दिन से मैंने मार्केट के हर “20,000” वाले लहंगे खरीदने शुरू कर दिए। उसने ये भी नहीं बताया था कि बीस हजार रुपए, डॉलर, युआन… या किस करेंसी का। तो मैंने दुनिया की हर करेंसी में बीस हजार के लहंगे खरीदने शुरू कर दिए। इस उम्मीद में… शायद कोई एक लहंगा ही उसे मेरे पास वापस ले आए।
अजनबी
आपकी मोहब्बत सुनकर मेरा दिल नम हो गया, सर। आप जैसा प्यार करने वाला मैंने कभी नहीं देखा। मैं आपके इश्क़ के आगे नतमस्तक हूं। दुआ करता हूं आपका प्यार आपको मिल जाए।
रईस
ऐसा सब कहते हैं, मेरे दोस्त। कुछ लोग मुझे पागल आशिक भी कहते हैं। तुम ये लहंगा लो… और अपने प्यार को दे दो। रिश्ते को संभालकर रखना।
अजनबी
लेकिन आप मुझे ये लहंगा देने को तैयार कैसे हो गए? अगर आपको भरोसा है कि इसके जरिए आपकी मोहब्बत लौट आएगी?
रईस
तुम्हें जवाब मिल जाएगा। बस वादा करो — इसके बाद बिना एक भी सवाल किए यहां से चले जाओगे।
अजनबी
प्रॉमिस।
रईस
मैं कल एक बच्ची से मिला। अगले ही पल उसकी मां से भी मुलाकात हुई। वो वही लड़की थी… जिसके इंतज़ार में मैं सालों से लहंगे जमा कर रहा था। मैं खुद को एक जगह रोककर बैठा रहा… और ये भूल गया कि वक्त कभी नहीं रुकता। मेरी मोहब्बत… मुझसे बहुत आगे निकल गई। हमेशा के लिए।
“मोहब्बत में वादे निभाना जरूरी है, लेकिन वक्त के साथ चलना उससे भी ज्यादा जरूरी है।” – ऋषभ भट्ट
Written by

Rishabh Bhatt

Storyteller • Poet • Engineer

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