उर्दू नज़्में
Season–1कुदरत का नूर 👑
"बड़ी फ़ुरसत से एक दिन चांद मुस्कुराया था,
खुदा ने तब तुमको इस जहां के लिए बनाया था,
सूफी की अज़ानों में हर मुराद बस तेरे लिए थी,
जैसे कुदरत में कोई नूर आ थमका हो
रौशन थी तूं और जहां अंधेरे लिए थी।"
आंखों की मोहताज रंगीलियों की उमंग,
लहलहाती लुपट्टे में मोतियों के संग,
आईने की तस्वीर में दिल के धड़कनों की हरकत,
शहंशाहों का रुतबा ख़ुदा की बरकत,
किसी बच्चे के हाथों में पहली किताब,
खूबसूरती के झूले पर आबरु-ए-शबाब,
नज़्मों की ज़ुबां में गीत गाता मल्लाह,
जन्नत को जाने की इकलौती राह,
तेरे चलने से इस जहां में,
रुखसतों को आसियान मिले,
तुझे देखकर सूरज ढले,
और तारों को निकलने का बहाना मिले,
तेरे इशारे से किस्मत छूती
ऊंचाईयों की उड़ान,
जैसे मेमने को क्यारी मिले
और गरीब को मकान,
तूं ओस की बर्फिली बूंदों में
तिनके पर छाई जुनून,
तूं सुबह की ठण्डी हवा
और रातों की सुकून,
लोगों की दुआओं में
टूटते तारों की पहली मुराद,
तूं ही है इश्क की इल्तिज़ा
और मुंतजिर पल की आख़री याद।
किताब : मेरा पहला जुनूं इश्क़ आखरी
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
Author's Note
हर रचना के पीछे की छोटी-सी कहानीतो आखिरकार हम इस सफ़र के आख़िरी पड़ाव पर पहुँच गए।
सबसे पहले, दिल से शुक्रिया। ❤️
इस पूरी "उर्दू नज़्में" Series में मेरा साथ निभाने, हर नज़्म को अपना वक़्त देने और अपने जज़्बात मुझ तक पहुँचाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। एक लेखक के लिए इससे बड़ी बात कुछ नहीं होती कि उसके लिखे हुए अल्फ़ाज़ किसी अनजान इंसान के दिल में अपनी जगह बना लें।
"कुदरत का नूर" इस Season की आख़िरी नज़्म है। लेकिन यह अलविदा नहीं, सिर्फ़ एक छोटा-सा विराम है। हमारे इस Blog पर ऐसी ही कई और Series आपका इंतज़ार कर रही हैं—हर Series अपने अलग एहसास, अलग कहानियों और अलग दुनिया के साथ। और मुझे पूरी उम्मीद है कि बहुत जल्द मैं "उर्दू नज़्में – Season 2" लेकर फिर आपके सामने हाज़िर होऊँगा।
अब बात इस नज़्म की...
"कुदरत का नूर" मैंने 11 नवंबर 2022 की रात, लगभग 10 बजे लिखनी शुरू की थी। वजह बहुत ख़ास थी। कुछ ही घंटों बाद, यानी 12 नवंबर, किसी ऐसे इंसान का जन्मदिन आने वाला था, जो उस वक़्त मेरी दुनिया का सबसे ख़ूबसूरत हिस्सा था। उसकी मासूमियत, उसकी सादगी, उसकी ख़ूबसूरती... और उर्दू अदब से जितनी भी नज़ाकत मैंने सीखी थी, उन सबको एक ही नज़्म में समेटने की कोशिश की।
रात के 12 बजे मैंने उसे Birthday Wish करने की कई कोशिशें कीं। Chat खोली, Message लिखा... लेकिन न जाने क्यों, उसे भेजने की हिम्मत नहीं हुई। कई बार लिखा, कई बार मिटाया। आख़िरकार, करीब 2 बजे मैंने यही नज़्म उसके साथ Birthday Wish भेज दी।
उसके बाद क्या हुआ?
उस कहानी का जवाब अभी यहीं रहने देते हैं। शायद किसी और नज़्म, किसी और Season, या किसी और किताब में वह किस्सा भी आपसे साझा करूँगा।
अंत में, अगर इस पूरी Series में आपको कहीं अपना पहला प्यार मिला, कहीं अपना इंतज़ार, कहीं अपनी तन्हाई, कहीं अपनी मुस्कुराहट... तो समझूंगा कि ये सफ़र सिर्फ़ मेरा नहीं था। बल्कि ये हमारी साझा कहानी थी। फिर मिलेंगे... एक नई Series, नए एहसासों और नई नज़्मों के साथ।
अगर ये नज़्म आपको connect कर पाया हो, तो नीचे comment करके अपनी बात ज़रूर बताइए। 💬 इसे अपने दोस्तों के साथ share भी कीजिए, शायद किसी को इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो। ❤️ और हाँ, हर Friday RishNova पर एक नया ब्लॉग आता है, तो अगला पढ़ना miss मत कीजिए! ✨
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