दिव्य भक्ति संग्रह
Shree Radheshyam Specialराधा कृष्णमयी 🪷
तुम गीत रागिनी में रमती,
तुम चन्द्र रश्मि से प्यारी,
तेरे चरण पुष्प मृदु लागे,
हो नवनीत स्वयं बलिहारी।
तुम रति प्रिय श्री लाली,
तुम प्रेम पुष्प की डाली,
फिरें तीन लोक के स्वामी,
जिनके पीछे बन वनमाली।
तुम प्रभा पूर्ण श्री राधे,
तुम रुचिर रूप से आगे,
तेरी एक दरस पाने को,
हर सावन बरखा भागे।
तुम बरसाने के रज–रज में,
तुम उर–उर की ठकुरनी,
श्री रम्य रूप यह तेरी,
रवि किरणों से बखानी।
तुम छवि मनोहर उर साजै,
तुम रूप, रम्य आ विराजै,
तुम अर्ध कृष्ण हो राधे,
हे कृष्णमयी, तेरी जय–जय।
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
Author's Note
हर रचना के पीछे की छोटी-सी कहानी श्री राधाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।
RishNova परिवार की ओर से आप सभी को श्री राधारानी के जन्मोत्सव की अनंत शुभकामनाएँ और आशीर्वाद। श्री राधा की कृपा आपके जीवन में प्रेम, शांति और भक्ति का उजाला बनाए रखे। आपके मन में जहाँ भी कोई अधूरापन हो, वहाँ राधारानी अपने प्रेम से पूर्णता भर दें।
कहते हैं, जब वृषभानु महाराज और माता कीर्तिदा के घर एक अत्यंत दिव्य कन्या का आगमन हुआ, तो पूरा बरसाना जैसे आनंद से भर उठा। उस बालिका का नाम रखा गया—राधा। लेकिन एक बात माता-पिता के मन को लगातार विचलित करती रही। वो नन्हीं बालिका अपनी आँखें नहीं खोलती थी।
दिन बीतते गए। घर में उत्सव था, आनंद था, लेकिन माता-पिता की चिंता भी थी। इतनी सुंदर बालिका, और फिर भी उसकी आँखें जैसे इस संसार को देखने से इंकार कर रही थीं। उधर गोकुल में नंद बाबा के घर एक नन्हा श्याम अपनी बाल लीलाओं में सबका मन मोह रहा था। और फिर आया वो क्षण, जिसे भक्त-परंपरा राधा और कृष्ण के प्रथम मिलन के रूप में स्मरण करती है।
वृषभानु महाराज के घर उत्सव था। नंद बाबा, माता यशोदा और बालक कृष्ण भी वहाँ पहुँचे। घर में सबकी दृष्टि उस नन्हीं राधा पर थी। और तभी कृष्ण की दृष्टि राधा पर पड़ी। नन्हे कृष्ण धीरे-धीरे रेंगते हुए राधा के समीप पहुँचे। और जैसे ही श्यामसुंदर उनके सामने आए, कहा जाता है कि राधा ने पहली बार अपनी आँखें खोलीं।
उन आँखों ने संसार को नहीं देखा। उन्होंने सबसे पहले कृष्ण को देखा। यही इस कथा का सबसे सुंदर भाव है। जिसे संसार एक बालिका की आँखों का न खुलना समझ रहा था, भक्त-परंपरा उसे कृष्ण-दर्शन की प्रतीक्षा मानती है। मानो राधा ने अपनी आँखें जन्म से ही किसी और के लिए नहीं, केवल अपने श्यामसुंदर के लिए सँभालकर रखी हों।
और शायद इसीलिए राधा-कृष्ण का प्रेम केवल दो हृदयों की कहानी नहीं लगता। ये उस प्रेम की कहानी है जिसमें मिलना भी पहले से लिखा होता है और पहचानना भी। कृष्ण ने राधा को देखा और राधा ने कृष्ण को। बस, यहीं से वो प्रेम शुरू हुआ जिसे संसार आज भी समझने की कोशिश करता है।
इसी भाव में कुछ लिखने बैठा था। सबसे पहले मेरी कलम से ये शब्द निकले—
भटका हूँ कब से राधे तेरे रहते, है आस पकड़ लोगी तुम बहते–बहते, ये जीवन धारा है, तू मेरा किनारा है, अब पार लगूं जिस भी बस तेरा सहारा है।इन कुछ पंक्तियों में मेरे लिए राधा कोई केवल पूजनीय नाम नहीं हैं। वो उस जीवन-धारा का किनारा हैं जिसमें मनुष्य कितना भी भटक जाए, अंततः लौटना उसी प्रेम की ओर चाहता है। “भटका हूँ कब से” में मेरी अपनी बेचैनी है। “पकड़ लोगी तुम” में विश्वास है कि राधा से दूर होकर भी राधा अपने भक्त को स्वयं से दूर नहीं होने देंगी। और फिर— “ये जीवन धारा है, तू मेरा किनारा है।” शायद इससे सरल शब्दों में राधा के प्रति अपनी भावना कह पाना मेरे लिए संभव भी नहीं था। मैंने सोचा था, यहीं से आगे कुछ और लिखूँगा। लेकिन राधा के बारे में लिखते-लिखते मेरी कलम किसी और ही भाव में चली गई। और जो आगे लिखा गया, वो केवल कृष्ण के प्रेम की बात नहीं रही। वो श्री राधा के रूप, उनकी छवि और उनकी महिमा का एक छोटा-सा स्मरण बन गई। इसीलिए आज आपने जो कविता ऊपर पढ़ी, वह उसी भाव से जन्मी है। ये कविता श्री राधा का वर्णन करने का मेरा प्रयास नहीं है। क्योंकि सच कहूँ तो श्री राधा का पूर्ण वर्णन करना मेरे लिए तो क्या, शायद समूचे ब्रह्मांड के लिए भी संभव नहीं। फिर भी मेरी कलम से जो कुछ शब्द निकले, उन्हें मैं अपनी रचना मानने का साहस नहीं करता। अगर उन शब्दों में कहीं कोई सुंदरता है, कोई भक्ति है, कोई भाव है—तो वो श्रीजी की ही दी हुई है। मेरी कलम तो बस एक माध्यम थी। इसलिए ये कविता मेरी रचना नहीं, मुझ पर श्री राधा का एक छोटा-सा उपकार है। और शायद इसी विश्वास के साथ इसे आपके सामने रख रहा हूँ। श्री राधे राधे। 🦚 राधा रानी की जय। 🌸 श्री राधा कृष्ण की जय। 🙏🏻 अगर इस लेख और कविता ने आपके मन में भी राधा नाम से जुड़ा कोई भाव जगाया हो, तो अपने विचार comment में जरूर लिखिए और इसे अपने किसी ऐसे व्यक्ति के साथ share कीजिए, जिसके लिए राधा नाम केवल एक नाम नहीं, एक एहसास है। और RishNova से जुड़े रहिए— हर Friday एक नई writing, एक नया एहसास और एक नई कहानी आपका इंतज़ार करती है।
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