Mutthiyan – Inspired by the Lucknow Aliganj Fire Tragedy 🕯️ | Rishabh Bhatt | Cheekh

चारों तरफ धुआँ, थमती साँसें... और आख़िरी पल में बंद होती वो मुट्ठियाँ! पढ़िए लखनऊ अग्निकांड के उस दर्द को करीब से

CHEEKH S1

Unfiltered. Unapologetic. Real.

मुट्ठियाँ

मुठ्ठी भर साँस मुट्ठियाँ ही दुबकाए, जूझती सी लपटों से, यह निठुर पल बीत जाए। ये अग्नि का मर्दन, वज्र सा उर को भेदता; सजल हो, प्रलय का यह पल बीत जाए। नभ गर्जना छेड़े, तड़ित कर आगाज, मेघ बरस उठो। झुलसे नरों की तप्त अस्थियां, श्रान्त हो–हो बची सी, देखती मनु–पुत्र हमीं को। यह दुर्निवार अग्निकुंड! दहकता–दहकता, निस्सीम रूप ले, चला छूने करो को, पर ज्यों छू न सका, लगा दहकने। धुंध था या अवसाद मेघमयी? बिन मयंक निशा बिखेरती। हत्यारी धुंध, धूं-धूं कर लेती रही प्राण। दे हृदय पर कंटक, यह गहन रात्रि थी, दिन नहीं। यह अमा, तिमिर या कालिमा ही थी, कि कोई अग्नि का उत्कर्ष नहीं। 🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿 ✒️ Poet in Hindi | English | Urdu 💼 Engineer by profession, Author by passion

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Author's Note

कुछ बातें, जो कहना ज़रूरी लगा
नमस्कार! मेरे प्यारे दोस्तों, जैसा कि आप सभी जानते हैं, आज Tales & Talks सीरीज़ की नई कहानी "ज़िंदगी बेशकीमती है" आने वाली थी। लेकिन वह आज प्रकाशित नहीं हो सकेगी। इसके लिए मैं आप सभी से क्षमा चाहता हूँ। इसका कारण है 22 जून 2026 को हुई लखनऊ अलीगंज फायर ट्रैजेडी, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों ने अपनी जान गंवाई, और कई परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया। यह घटना सुनकर हर किसी का दिल दुखी हो गया। इसी वजह से मुझे लगा कि आज किसी कहानी से पहले, इस घटना पर अपनी भावनाएँ व्यक्त करना ज़्यादा ज़रूरी है। इसलिए आज मैं अपनी कविता "मुट्ठियाँ" आपके साथ साझा कर रहा हूँ। यह कविता उन लोगों की याद में लिखी गई है, जिन्होंने इस हादसे में अपनी जान गंवाई। इसमें आग, धुआँ, डर और उन आखिरी पलों की बेबसी को महसूस करने की कोशिश की गई है, जिनसे शायद पीड़ित लोग गुज़रे होंगे। यह सिर्फ एक कविता नहीं, बल्कि उन खोए हुए जीवनों को एक छोटी-सी श्रद्धांजलि है। इस घटना से जुड़ी एक खबर में मैंने पढ़ा कि कई पीड़ितों की मुट्ठियाँ बंद थीं। डॉक्टरों का मानना था कि यह शायद इस बात का संकेत था कि घुटन और डर के उन आखिरी पलों में भी वे हार नहीं मान रहे थे, बल्कि खुद को संभालने और बचने की पूरी कोशिश कर रहे थे। यही बात मेरे दिल को सबसे ज़्यादा छू गई। सोचिए, जब चारों तरफ धुआँ हो, साँस लेना मुश्किल हो रहा हो, और फिर भी कोई आखिरी पल तक हिम्मत न छोड़े। "मुट्ठियाँ" की भावना वहीं से आई है। RishNova Team की ओर से और व्यक्तिगत रूप से मेरी ओर से, इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले सभी परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएँ। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्माओं को शांति मिले और उनके परिवारों को इस कठिन समय में हिम्मत और शक्ति मिले। 🕯️ सभी दिवंगत आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि।
Disclaimer : इस पोस्ट में उपयोग की गई मुख्य तस्वीर AI Generated है। AI तकनीक की सीमाओं के कारण तस्वीर में नाम, चेहरे या अन्य विवरणों में कुछ त्रुटियाँ हो सकती हैं। इसके लिए कृपया क्षमा करें। हमारा उद्देश्य केवल इस घटना के प्रति संवेदना व्यक्त करना है। "ज़िंदगी बेशकीमती है" अब अगले शुक्रवार को प्रकाशित की जाएगी। तब तक RishNova के साथ जुड़े रहिए, और हर शुक्रवार आने वाली हमारी नई कहानियाँ, कविताएँ और विशेष लेख पढ़ना न भूलिए। धन्यवाद। ❤️ — ऋषभ भट्ट & RishNova Team
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