दिव्य भक्ति संग्रह
Brother's Day Special 🌸शत्रुघ्न-श्रुतिकीर्ति : त्याग का मूक अध्याय
एक दिन माता कौशल्या
जब अपने कक्ष में सो रही थीं,
अचानक से उनकी नींद टूटी।
उन्हें छत पर किसी के चलने की पदचाप सुनाई दी,
जो वो पहले भी कई बार सुन चुकी थीं।
इस बार इसके तह तक जाने की उन्होंने ठान ली।
एक दीपक लिए
वो सीधा छत की ओर चल पड़ीं।
वहां उनके सामने
शत्रुध्न जी की पत्नी श्रुतिकीर्ति जी थीं,
जो इतना खोई हुई थीं
कि उन्हें माता कौशल्या के आने का आभास ही नहीं हुआ।
माता कौशल्या श्रुतिकीर्ति के पास गईं,
उन्हें स्नेह से गले लगाया और पूछ पड़ीं —
“पुत्री शत्रुघ्न कहां है?
कक्ष की शांति और तुम्हारी व्याकुलता
दोनों ही यह कह रहे हैं कि वो तुम्हारे साथ नहीं,
तो कहां है?”
श्रुतिकीर्ति जी की आँखें भर आईं।
भावुक स्वर में उन्होंने माता कौशल्या को जवाब दिया —
“हे मां,
उनसे मिले तो कई साल हो चुके हैं।
भईया राम, जिन्होंने पुत्र दायित्व निभाया,
भईया लक्ष्मण, जो उनकी परछाईं बनके साथ चले गए
और भईया भरत,
जो एक जोगी का जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
ऐसे में आपका सबसे छोटा लल्ला,
कैसे राजसी सुख भोग सकता था?”
माता कौशल्या को अभी भी कुछ समझ नहीं आया,
लेकिन उनका हृदय
पहले ही उस बात से द्रवित हो उठा था
जिसे वो सुनने वाली थीं।
उनके मुख से कुछ ही शब्द निकले —
“पुत्री,
कहां है मेरा लल्ला?”
और उन्हें जवाब मिला —
“माता,
वो पूरा दिन भरत भईया की सेवा करते हैं,
ताकि भईया राम की आज्ञा का पालन हो सके
और राज्य संचालन बना रहे।
लेकिन रात होते ही
भईया भरत के आदेश पर
वो महल की ओर चल देते हैं।
फिर भी आज तक महल पहुंचे ही नहीं।
उन्होंने रास्ते में,
एक वृक्ष के नीचे
अपना आश्रय बना रखा है
और अपने तीनों भाइयों के जैसे
अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।
हे मईया,
मैं नहीं चाहती कि मेरे संग
वो महल के राजसी सुख भोगें,
मेरी तो बस इतनी प्रार्थना है
कि वो मुझे अपने साथ रख लें
ताकि मैं उनकी सेवा कर सकूं।”
यह सुन
माता कौशल्या की आँखें भर आईं।
उनके शब्दों में केवल आशीष था —
“धन्य हैं मेरे चारों लाल
और धन्य हैं मेरी चारों कुलवधुएं,
जिन्होंने इस संसार को
भ्रातृ प्रेम, त्याग और मर्यादा का सबसे अलौकिक उपहार दिया”
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
हैप्पी ब्रदर्स डे
भाई के प्रेम और कर्तव्य की एक अनकही गाथा ✨ नमस्कार प्यारे पाठकों!
RishNova परिवार की ओर से आप सभी को ब्रदर्स डे (Brother's Day) की हार्दिक शुभकामनाएं!
भाई का रिश्ता दुनिया के सबसे अनमोल और पवित्र रिश्तों में से एक है। यह रिश्ता सिर्फ एक छत के नीचे साथ रहने का नहीं, बल्कि एक-दूसरे के स्वाभिमान, सुरक्षा और खुशी के लिए ढाल बनकर खड़े होने का नाम है। भाई वो मजबूत स्तंभ होते हैं, जो वक्त पड़ने पर पिता की तरह रास्ता दिखाते हैं और दोस्त की तरह हर सुख-दुख साझा करते हैं।
जब भी हम भ्रातृ-प्रेम (भाइयों के प्यार) और एकता की बात करते हैं, तो हमारे मन में इतिहास के दो सबसे बड़े उदाहरण आते हैं— रामायण और महाभारत।
महाभारत में पांडवों की एकता इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। पांच भाई, पांच अलग-अलग शक्तियां, लेकिन जब बात धर्म और परिवार की आई, तो वे सब मिलकर एक मुट्ठी बन गए। उनके बीच का प्रेम और आदर ऐसा था कि बड़े भाई युधिष्ठिर के एक आदेश पर बाकी चारों भाइयों ने अपना पूरा जीवन दांव पर लगा दिया। पांडवों का यही आपसी प्रेम हमें सिखाता है कि भाइयों की एकजुटता में कितनी बड़ी शक्ति होती है। (RishNova के प्यारे पाठकों, हमें आपको बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि बहुत जल्द हम पांडवों की इसी अटूट एकता और प्रेम पर भी एक विशेष कविता लेकर आने वाले हैं!)
लेकिन आज, इस ब्रदर्स डे के खास मौके पर, हम आपके लिए रामायण के इतिहास के एक ऐसे पन्ने को कविता के रूप में लाए हैं, जिसकी चर्चा बहुत कम होती है।
हम सब श्रीराम के लिए लक्ष्मण जी के वनवास और भरत जी के नंदीग्राम में तपस्वी जीवन के त्याग को जानते हैं। लेकिन इस राजघराने में एक चौथा भाई भी था— शत्रुघ्न जी।उन्होंने न वनवास चुना, न नंदीग्राम की कुटिया, बल्कि महल में रहकर भी राजसी सुखों का त्याग कर दिया। उन्होंने भाई के प्रति अपने कर्तव्य को इस कदर निभाया कि अपनी पत्नी श्रुतिकीर्ति से भी दूर रहे, ताकि भाइयों की सेवा और राज्य का संचालन बिना किसी बाधा के चल सके। यह भाई के प्रति समर्पण की पराकाष्ठा है।
आशा है RishNova की यह विशेष प्रस्तुति आपको बेहद पसंद आई होगी और इसने आपके हृदय को छू लिया होगा।
हर Friday एक नई रचना, एक नया एहसास और एक नई कहानी आपका इंतज़ार करती है। अगर आपको दिल से लिखे हुए शब्द पसंद हैं, तो इस सफ़र का हिस्सा बने रहिए। एक बार फिर, RishNova परिवार की तरफ से आप सभी को हैप्पी ब्रदर्स डे! अपने भाइयों को गले लगाइए, उन्हें धन्यवाद कहिए और इस ब्लॉग को उनके साथ शेयर करना न भूलें।
॥ जय श्री राम... Happy Brother's Day 🌸 ॥
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