श्यामा लाग तेरी जोगनिया को,
पागल सी नगरों में भटकाती है,
नाम तेरो लिख लिखके आठ पहर,
मधुर–मधुर धुन गाती है,
कोई रास रचाए गोपियन से,
जो भोर देख घर छोड़ रहीं,
भैरों की तरह हर फूलन पे,
भिन भिन नयन मरोड़ रहीं,
तुम फूल बनो मेरे सांवरिया,
तेरी महक हृदय को महकाती है,
नाम तेरो लिख लिखके आठ पहर,
मधुर–मधुर धुन गाती है।
तेरे इश्क़ में बावरी होके देखो,
मेंहदी से श्याम लिखाई रहीं,
अपनी छवि संग तेरो रूप सुहावन,
ले जग को दर्श दिखाई रहीं,
चितवन में बूंद उतर सांवरिया,
तेरो प्रेम गगन से बरसाती है,
नाम तेरो लिख लिखके आठ पहर,
मधुर–मधुर धुन गाती है।
हर जनम मोहे यह लाग लगे,
तुम हृदय से दूर न हो मेरे,
दर्श तेरो मैं पाऊं युग–युग तक,
निदियां से उठ रोज सवेरे,
तेरे रूप अनेकों हैं सांवरिया,
पर मुरली संग मोहे भाती है,
नाम तेरो लिख लिखके आठ पहर,
मधुर–मधुर धुन गाती है।
किताब : देव वंदना
🌿 Written by
Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion