Bhale Do–Chaar Din The ⏳ – Rishabh Bhatt | Aashiqon Ki Gali Me S4
personRishabh Bhatt
March 01, 2026
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Aashiqon Ki Gali Me : Season 4
Bhale Do–Chaar Din The...
इश्क़ दो पल के हमारे,
दर्द सारी उम्र की है,
फासले दो कदम के हैं,
और दूरियां ज़िंदगी भर की हैं,
हमीं उम्मीद थे,
उम्मीदों में समाना था,
भले दो–चार दिन थे,
जमाना था...।
किसी को छुके–
जब रौशनी ढल जाती है,
मोमबत्तियां इक–इक कर,
पिघल जाती हैं,
जिस्म को वो मिजाज़ –
आजमाना था,
भले दो–चार दिन थे,
जमाना था...।
कल अगर ख़्वाबों की लौ,
बिन बात बुझ जाए,
झपकियां आ–आ कर,
मेरी नींदें चुराएं,
मेरी उम्मीदों को मरा कहना,
दिल मुझको ही लगाना था,
भले दो–चार दिन थे,
जमाना था...।
खूबसूरती पे उछल
जवानी बह जाती है,
होंठों से आजकल
कहानी बह जाती है,
गमों का हर किस्सा,
बेशक छुपाना था,
भले दो–चार दिन थे,
जमाना था...।
मत कर ख़ौफ़,
तू मेरे मुंतशिर होने से यार,
इश्क़ में मरते हैं,
आशिक हमेशा दो–चार,
छोड़कर न गई होती,
अगर मुझको बचाना था,
भले दो–चार दिन थे,
जमाना था...।
काफिला तू मेरे दिल का,
फिर सफर मुझको मिले न मिले,
सींचना मेरा काम है,
कोई फूल चाहें खिले न खिले,
दरख़्तों को इन रुखसत में,
तुम्हें ही काट जाना था,
भले दो–चार दिन थे,
जमाना था...।
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet inHindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
Rishabh Bhatt is an author, poet, and engineer. Writing has been his passion since childhood, and he blends emotions with experiences in every piece he creates. Explore his world of poetry and stories on RishNova.