जंग खत्म कर दो मैं हार कर खड़ा,
मेरा शहंशाह ही मुझको मार कर खड़ा,
गर्दन किन दुश्मनों की उतारूं अब?
कोई अपना ही दहलीज पार कर खड़ा,
जीना था उम्र भर जिनके लिए,
जीना ही वो दुश्वार कर खड़ा,
ईमान पर कालिख लगी है, फिर भी –
कहना है खुद को संवार कर खड़ा,
मेरे हाथों में तलवार की ताकत,
सिर को धड़ से उतार कर खड़ा,
मंजिल से चाह इतनी थी मुझको,
क़दमों को खुद के लाचार कर खड़ा,
दिलनशी का किस्सा आज देखो,
दिल्लगी को अपने गद्दार कर खड़ा।
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
कुछ एहसास ऐसे होते हैं जो बोलते नहीं, बस रह जाते हैं—माहौल में, यादों में, और सांसों के दरमियान। “Urdu Nazmein” की ये नई कड़ी उन्हीं एहसासों की महक है—जहाँ हर शेर किसी ख़ामोश दुआ की तरह ठहरता है, और हर अल्फ़ाज़, चाँद की नमी और रात की रूहानी ख़ुशबू से भीग जाता है।
ये series उन एहसासों की तश्बीह है, जो स्याही में नहीं, सांसों में लिखे गए हैं। जहाँ मोहब्बत अपनी रवानगी में हया को साथ लेकर चलती है, और जुदाई भी किसी शायरी की तरह ख़ूबसूरत लगती है।
कभी ये नज़्में दिल के टूटे हुए शीशों पर चाँदनी बनकर उतरती हैं, कभी किसी पुरानी याद की तह में छुपे नाम को फिर से जगा देती हैं। यहाँ हर मिसरा एक आईना है — जो सिर्फ़ चेहरा नहीं, एहसास की परतें दिखाता है।
मैं Rishabh Bhatt, profession से engineer हूँ, मगर दिल से एक poet और author। मेरी poetries Amar Ujala Kavya जैसे मंचों पर प्रकाशित होती हैं, और इस सीरीज़ के पिछले seasons की सभी नज़्में मेरी किताबों “Mera Pahla Junu Ishq Aakhri” और “Main Usko Dhoondhunga Ab Kahan?” का हिस्सा रही हैं जो आज Amazon, Flipkart, Notion Press, Pothi.com सहित दुनिया भर के सैकड़ों प्लेटफॉर्म्स पर available हैं। 🌍📚
“Urdu Nazmein” महज़ अल्फ़ाज़ का संग्रह नहीं, बल्कि रूह की तहज़ीब में लिखी हुई वो तहरीरें हैं जो पढ़ी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं। यहाँ हर शेर किसी मोमबत्ती की लौ की तरह है — धीरे-धीरे जलता, मगर रोशनी फैलाता हुआ।
अगर आपने कभी किसी बात को कहना चाहा हो पर ख़ामोश रह गए हों, तो यह सीरीज़ आपके लिए है — क्योंकि यहाँ, हर ख़ामोशी एक मोहब्बत का बयान है। 💫
आपके हवाले करता हूँ ये “Urdu Nazmein”, क्योंकि मुझे यकीन है इनकी कद्र आपसे बेहतर कोई नहीं के सकता...🙏🏻