Himmat Hai Fauladi 💪 – Rishabh Bhatt | Zidd Zinda Hai
personRishabh Bhatt
December 23, 2023
0
share
ज़िद्द ज़िंदा है : Season–1
हिम्मत है फ़ौलादी 💪
हिम्मत है फ़ौलादी तो क्यों रुके हम?
करनी है अपनी एक दिन तो क्यूं झुके हम?
चलना होगा अब तो देखेंगे रोकेगा कौन,
ख़ुद हमारी गरज सुनके आसमां भी होगा मौन,
उम्मीदों का सूरज जब देता खुद पहेरा,
जुल्म की इस दुनिया में हसता ही रहेगा चहेरा,
जादूई इस दुनिया में आंखें क्यूं कर ले नम?
हिम्मत है फ़ौलादी तो क्यों रुके हम?
किस्मतों के हाथों में हैं लिखीं अपनी मुरादें,
मांगके फिर दुनिया से क्यों खुद को गिरा दें!
देने वाला रहता है तारों के संग आसमां में,
मेहनत से चलना है तो फिर चांद ढूंढने शमां में,
कायनात अपनी बनाने में कदमें क्यूं जाए थम?
हिम्मत है फ़ौलादी तो क्यों रुके हम?
गैसों की इस दुनिया में सांसें हम चुनते हैं,
फलकों की छलनी से राहों के पत्थर बुनते हैं,
फुलझड़ियों के दिलासे सुनकर क्यूं पड़ जाएं कमज़ोर?
उम्मीदों की तरंगें जब फैली हैं चारों ओर,
दूरी है बस कुछ ही कदमें क्यूं हो कम?
हिम्मत है फ़ौलादी तो क्यों रुके हम?
करनी है अपनी एक दिन तो क्यूं झुके हम?
हिम्मत है फ़ौलादी तो क्यों रुके हम?
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
कभी हार मान लेने का मन हुआ, तो कलम ने कहा — “ज़िद्द ज़िंदा है।” यहीं से शुरू हुई इस सीरीज़ की कहानी — उन लोगों की, जो टूटे तो सही, मगर बिखरे नहीं। जो गिरे, मगर हर बार उठ खड़े हुए।
‘Zidd Zinda Hai’ सिर्फ कविताओं का नाम नहीं, एक सोच है — कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला सांस ले रहा है, तो जीत अब भी मुमकिन है।
इस सीरीज़ की कई कविताएँ Amar Ujala Kavya पर भी प्रकाशित हैं और ये मेरे किताब “ये आसमां तेरे कदमों में है” का भी हिस्सा हैं।
मैं ऋषभ भट्ट, profession से एक engineer पर दिल से एक Writer हूँ। मेरी कलम ने हमेशा कोशिश की है कि शब्द सिर्फ पढ़े न जाएँ, बल्कि किसी के भीतर सोई हुई उम्मीद को जगाएँ।
मेरी किताबें — मेरा पहला जुनूं इश्क़ आख़री, ये आसमाँ तेरे क़दमों में है, Sindhpati Dahir 712 AD …और कई अन्य रचनाएँ Notion Press, Pothi.com, Amazon, Flipkart सहित सैकड़ों प्लेटफ़ॉर्म्स पर उपलब्ध हैं।
एक आखरी बात, ‘जब तक साँसें हैं, जब तक सपने ज़िंदा हैं, ज़िद्द भी ज़िंदा है। 💪✨’