Ab Bhi Der Nahi Hai ⏳ – Rishabh Bhatt | Zidd Zinda Hai
personRishabh Bhatt
March 04, 2023
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ज़िद्द ज़िंदा है : Season–1
अब भी देर नहीं है ⏳
शेष परिक्षा जीवन की अब भी हाथ तुम्हारे,
कल्पित उर के स्वप्न सभी हैं पल-पल साथ तुम्हारे,
शून्य-क्षितिज तक बाकी है कई निशानी जाने को,
मलयानिल के आंचल में पग पवित्र बिछाने को,
जगत पिता परमेश्वर, स्वयं सांध्य में शामिल,
बनकर दीप जलाने को, जगमग-जगमग झिलमिल,
समय शेष है मुठ्ठी में — धिक! आंखों का फेर नहीं है,
तुम देख रहे क्यूं थककर भाई! अब भी देर नहीं है।
हिम-गिरि से पिघल गई, नयन अश्रु कण ले ले कर,
नाव सरित में ठहरी किन्तु नई दिशा को देकर,
हृदय सजग कर भाई! — सूदूर गूंजती संगीत मधुर,
प्यास तुम्हारी वहीं बुझेगी, वहीं तृप्त होगा यह उर,
चैतन्य द्वार पर, बन क्षणिक स्वास का पहरेदार,
स्वयं खड़ा परमेश्वर करने जीवन का उद्धार,
उत्साह शेष है पग में — हा! कांटों का फेर नहीं है,
तुम देख रहे क्यूं थककर भाई! अब भी देर नहीं है।
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
कभी हार मान लेने का मन हुआ, तो कलम ने कहा — “ज़िद्द ज़िंदा है।” यहीं से शुरू हुई इस सीरीज़ की कहानी — उन लोगों की, जो टूटे तो सही, मगर बिखरे नहीं। जो गिरे, मगर हर बार उठ खड़े हुए।
‘Zidd Zinda Hai’ सिर्फ कविताओं का नाम नहीं, एक सोच है — कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला सांस ले रहा है, तो जीत अब भी मुमकिन है।
इस सीरीज़ की कई कविताएँ Amar Ujala Kavya पर भी प्रकाशित हैं और ये मेरे किताब “ये आसमां तेरे कदमों में है” का भी हिस्सा हैं।
मैं ऋषभ भट्ट, profession से एक engineer पर दिल से एक Writer हूँ। मेरी कलम ने हमेशा कोशिश की है कि शब्द सिर्फ पढ़े न जाएँ, बल्कि किसी के भीतर सोई हुई उम्मीद को जगाएँ।
मेरी किताबें — मेरा पहला जुनूं इश्क़ आख़री, ये आसमाँ तेरे क़दमों में है, Sindhpati Dahir 712 AD …और कई अन्य रचनाएँ Notion Press, Pothi.com, Amazon, Flipkart सहित सैकड़ों प्लेटफ़ॉर्म्स पर उपलब्ध हैं।
एक आखरी बात, ‘जब तक साँसें हैं, जब तक सपने ज़िंदा हैं, ज़िद्द भी ज़िंदा है। 💪✨’