माँ,
कभी माँ की आंखों में आंखें डालकर बोला है आपने,
कि माँ, आप दुनिया की सबसे सुन्दर स्त्री हो...
शायद नहीं।
उन हाथों को, जो अक्सर रोटियां बनाते समय लाल हो जाती हैं,
शायद ही किसी के होंठों तक पहुंच पाई हों।
कितना बदल चुके हैं हम, यार!
कि आज मूर्तियों की भी पूजा करते हैं,
तो बदले में एक फरमाइश तैयार होती है।
श्रद्धा, प्यार, भक्ति, समर्पण जैसी हर शब्दों की परिभाषाएं बदल चुकी हैं,
लेकिन माँ का वो प्यार, जो हमें नौ महीनों तक अपने सीने से लगाए रखता है,
आज भी वैसा ही है।
सौभाग्य है हमारे अस्तित्व का कि हमारी संस्कृति स्वयं देवी आदिशक्ति हैं।
फिर भी एक कमी है,
कि हम राम की शक्तिपूजा को भूल चुके हैं,
और संर्घष को जीतना चाहते हैं।
आज, घंटियों की आवाज से पहले, एक बार माँ के उस आवाज को सुनना होगा,
जो शाप बनकर भी कृष्ण के लिए अमृत के समान थी।
और यही अमृत मंत्र है...।
माँ के आंचल में इस प्रकृति ने उत्पत्ति के उस राज को छुपाया है,
जो हर शुरुआत के लिए जरूरी है,
और जिज्ञासा का अंतिम पड़ाव स्वयं माँ देवी आदिशक्ति हैं।
तो, एक बार खुद को बदलकर चलिए,
क्योंकि मंदिरों को भी एक सच्चे भक्त का इंतजार है।
किताब : देव वंदना
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
मैं वही लिखता हूँ जो मेरे दिल की गहराइयों से निकलता है। बचपन से ही माता रानी की कृपा मेरे जीवन की राह रही है। उनके भक्ति गीतों की गूँज और मंदिर की घंटियों की ध्वनि मेरे लिए सिर्फ आवाज़ें नहीं, बल्कि आत्मा की राह दिखाने वाले संकेत रही।
मेरी कलम उन्हीं एहसासों की गूंज है—माँ दुर्गा की महिमा, उनके अवतारों की प्रेरणा और भक्तिभाव की सादगी। हर शेर, हर कविता एक आध्यात्मिक यात्रा है, जो पढ़ने वाले के दिल में श्रद्धा और प्रेम की रोशनी जगाती है।
मैं कोशिश करता हूँ कि मेरी लेखनी आपके दिल तक वही अनुभूति पहुँचाए जो मैंने अपने अनुभव, भक्ति और ज्ञान में पाया है। हर शब्द में मेरी नम्रता और श्रद्धा, हर पंक्ति में मेरा सच्चा प्रेम और हर कविता में मेरी आत्मा का अंश है। ✨
मेरी आशा है कि मेरी कविताएँ आपके हृदय में माता रानी के प्रति सम्मान और प्रेम की चिंगारी जगा सकें और आपको भी वह शांति और मार्गदर्शन महसूस हो जो मेरे लिए हमेशा प्रकाश रही है। 🌿