क्रोध है गति क्रोध ही गरज,
क्रोध की महक से तुम बाग ये निखार दो,
गुलसानों के स्वप्न में सामर्थ्य की छवि को
तुम कर्म कर उतार दो।
वो सूरमा है सूरमा क्या?
जिसकी ध्वनि में न सृष्टि का सार हो,
वो कर्म भी है व्यर्थ,
अनर्थता का जिससे बस विस्तार हो,
चेतना सही समय से जो पल सके,
नैन की नदी में खुद को तुम उतार लो,
क्रोध है गति क्रोध ही गरज,
क्रोध की महक से तुम बाग ये निखार दो।
क्रोध की उपज में, क्रोध ही पले प्रेम से,
प्रेम को भावना में क्रोध ही नकार दो,
हो बहाव कर्तव्य का, सत्य का प्रवाह हो,
कर्म ही से कर्म को ललकार दो,
बेड़ियां ही पांव की पंख सा उड़ान दें,
तुम आसमां में खुद को यूं बिखेर दो,
हवाओं को लपट में प्रकाश की गति को,
तुम प्रकाश ही से फेर दो,
प्रेम भाव पुष्प है तो धूप है ज्वालन,
सृष्टि के सत्य को इस तरह स्वीकार लो,
क्रोध है गति क्रोध ही गरज,
क्रोध की महक से तुम बाग ये निखार दो।
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
कभी हार मान लेने का मन हुआ, तो कलम ने कहा — “ज़िद्द ज़िंदा है।” यहीं से शुरू हुई इस सीरीज़ की कहानी — उन लोगों की, जो टूटे तो सही, मगर बिखरे नहीं। जो गिरे, मगर हर बार उठ खड़े हुए।
‘Zidd Zinda Hai’ सिर्फ कविताओं का नाम नहीं, एक सोच है — कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला सांस ले रहा है, तो जीत अब भी मुमकिन है।
इस सीरीज़ की कई कविताएँ Amar Ujala Kavya पर भी प्रकाशित हैं और ये मेरे किताब “ये आसमां तेरे कदमों में है” का भी हिस्सा हैं।
मैं ऋषभ भट्ट, profession से एक engineer पर दिल से एक Writer हूँ। मेरी कलम ने हमेशा कोशिश की है कि शब्द सिर्फ पढ़े न जाएँ, बल्कि किसी के भीतर सोई हुई उम्मीद को जगाएँ।
मेरी किताबें — मेरा पहला जुनूं इश्क़ आख़री, ये आसमाँ तेरे क़दमों में है, Sindhpati Dahir 712 AD …और कई अन्य रचनाएँ Notion Press, Pothi.com, Amazon, Flipkart सहित सैकड़ों प्लेटफ़ॉर्म्स पर उपलब्ध हैं।
एक आखरी बात, ‘जब तक साँसें हैं, जब तक सपने ज़िंदा हैं, ज़िद्द भी ज़िंदा है। 💪✨’