Adbhut Swapn Ka Dera ✨ – Rishabh Bhatt | Zidd Zinda Hai
personRishabh Bhatt
October 24, 2021
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ज़िद्द ज़िंदा है : Season–1
अद्भुत स्वप्न का डेरा ✨
न जाने कैसी ये बला,
दूर मुझसे ही मैं चला,
चला न जाने कहां?
वो अकल्पित नव जहां,
इक नई दृष्टि प्रदान करती,
दे स्मरण शक्ति नादान करती,
करती आतुर मन में सबेरा,
अद्भुत स्वप्न का ये डेरा।
न जाने कैसा ये संकल्प,
आहुति देता हर विकल्प,
इक नई मार्ग को दर्शाता,
है बूंद को सागर बनाता,
शून्य भी यहां शूल बनके,
पतझड़ में इक फूल बनके,
व्याकुल मिटाने को अंधेरा,
अद्भुत स्वप्न का ये डेरा।
न जाने कैसा ये रथ,
अलबेलों का अलबेला पथ,
पथ ये जाता वहां जो कल है,
कल आता नहीं बस छल है,
छल ये कब तक छलेगा?
द्वन्द अंत तक चलेगा,
अंत भी तो अपना है कहां बसेरा!
अद्भुत स्वप्न का ये डेरा।
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
कभी हार मान लेने का मन हुआ, तो कलम ने कहा — “ज़िद्द ज़िंदा है।” यहीं से शुरू हुई इस सीरीज़ की कहानी — उन लोगों की, जो टूटे तो सही, मगर बिखरे नहीं। जो गिरे, मगर हर बार उठ खड़े हुए।
‘Zidd Zinda Hai’ सिर्फ कविताओं का नाम नहीं, एक सोच है — कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला सांस ले रहा है, तो जीत अब भी मुमकिन है।
इस सीरीज़ की कई कविताएँ Amar Ujala Kavya पर भी प्रकाशित हैं और ये मेरे किताब “ये आसमां तेरे कदमों में है” का भी हिस्सा हैं।
मैं ऋषभ भट्ट, profession से एक engineer पर दिल से एक Writer हूँ। मेरी कलम ने हमेशा कोशिश की है कि शब्द सिर्फ पढ़े न जाएँ, बल्कि किसी के भीतर सोई हुई उम्मीद को जगाएँ।
मेरी किताबें — मेरा पहला जुनूं इश्क़ आख़री, ये आसमाँ तेरे क़दमों में है, Sindhpati Dahir 712 AD …और कई अन्य रचनाएँ Notion Press, Pothi.com, Amazon, Flipkart सहित सैकड़ों प्लेटफ़ॉर्म्स पर उपलब्ध हैं।
एक आखरी बात, ‘जब तक साँसें हैं, जब तक सपने ज़िंदा हैं, ज़िद्द भी ज़िंदा है। 💪✨’
सुन्दर पंक्तियों से सुसोभित सुन्दर कविता
ReplyDeleteVery very nice poem
ReplyDeleteNice
ReplyDeleteBahut badhiya
ReplyDeleteMast kavita
ReplyDeleteBahut sundar pangtiya
ReplyDeletevery nice poetry
ReplyDelete👌👌👌👌👌
ReplyDeleteBahut sundar
ReplyDeleteBahut sundar
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteEk dam mast poem
ReplyDeleteBahut khoob racjna
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