Meri Zindagi Hai Tu 🌹 : Season–1
छब्बीसवीं तारीख़ 🗓️
चूने के शर्ट पर इश्क़ गुलाबों का रंग लाया,
पहली दफा मोड़ तारों को मैंने अंगूठी बनाया,
जलती अलाव के सामने बैठ निगाहें उसपे गड़ाए,
नादानियां सिरहाने रख अन्दर ही अन्दर मुस्कुराएं,
ये गूथे आटें पर दिल बना किसका है?
मेरी हाथों में लश्कारा सजा किसका है?
चाहती दलदल में फिसलने के अलावा,
निकलने का नहीं कोई तरकीब था,
फरवरी की छब्बीसवीं तारीख़, दिन अजीब–ओ–गरीब था।
कई मशहूरों का जमावड़ा था मेले में उस रात,
मैंने उसको देखा था अकेले में उस रात,
सतहों पर पहले ये पनडुब्बी आई न थी,
मेरी खेती में मोहब्बत की जैसे बुआई न थी,
कलियां खिली आफताब की, सितारों के पत्ते नज़र आएं,
दाएं–बाएं से अनजान हम मुसाफिर एक तरफे गुजर आएं,
पानी से सेका निगाहें भीगना धूपों में नसीब था,
फरवरी की छब्बीसवीं तारीख़, दिन अजीब–ओ–गरीब था।
औरों ने भी पाया मोती या गहराई मेरे साथ में,
डब्बे में दिल हमारा ढक्कन उसके हाथ में,
वो चाहे तो सांसे बंद कर दे या जिंदगी बन जाए,
मेरे सूट पर उसकी कमी है आकर टाई लगाए,
नहीं पंख थे हमारे फिर भी मिलन आसमां में,
गुलाबों का पन्ना जुड़ा उस दिन नई दास्तां में,
दिल चुराने का वो अलग ही तहजीब था,
फरवरी की छब्बीसवीं तारीख़, दिन अजीब–ओ–गरीब था।
किताब : मेरा पहला जुनू इश्क़ आख़री
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
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💫 What a mesmerizing piece! Every word feels alive with emotion — gentle yet powerful, like love whispered through verses. ❤️
ReplyDeleteYour poetry doesn’t just express love, it feels like love — pure, soulful, and timeless. 🌸
Truly, a masterpiece that touches the heart and lingers like a sweet memory. ✨