Parallel Lives : Season - 1
Main Desh Ka Yuva Hoon 🦾
मैं परिंदा थोड़ी न,
मैं पूरा आसमान हूँ,
मैं देश का युवा हूँ,
मैं ही अमृत वरदान हूँ।
राजनीति से परे,
रणनीति पर अग्रसर हूँ मैं,
पूरा विश्व देखता है जिसे,
मैं वो उठता हुआ सर हूँ,
देश को सेवा हूँ मैं,
समृद्धि का सत्कार हूँ मैं,
विश्व में बंधुत्व का परिचय,
वैक्सीन का उपहार हूँ मैं,
मैं अकेलेपन से भरा हुआ,
नई सोच का उड़ान हूँ,
मैं देश का युवा हूँ,
मैं ही अमृत वरदान हूँ।
नहरों–नहरों से देश के,
कोने–कोने में पहुंचता पानी हूँ,
नवभारत के कोख से जन्मा,
निर्माण की कहानी हूँ,
कि जिज्ञासा के शिखर पे पहुंचा,
चांद पर कदम हूं मैं,
हार एक की खुशी भी,
और गम हूँ मैं,
नई टेक्नालॉजी से परिपूर्ण,
मैं नेटवर्क का जहान हूँ,
मैं देश का युवा हूँ,
मैं ही अमृत वरदान हूँ।
इतिहास में लूटा जिसे,
मैं वक्त का वो युद्ध हूँ,
शांति की अमानत,
मैं वर्षों से बुद्ध हूँ,
देश का साइंटिस्ट, इंजीनियर,
डॉक्टर और मजदूर हूं मैं,
सिपाही की बंदूक भी,
प्यून के हाथों में झाड़ू का नूर हूँ मैं,
ऊंच–नीच से दूर,
मैं संस्कृति की धरोहर महान हूँ,
मैं देश का युवा हूँ,
मैं ही अमृत वरदान हूँ।
किताब : ये आसमां तेरे कदमों में है
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
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