Bhay : Ek Apayash 💥 – Rishabh Bhatt | Zidd Zinda Hai
personRishabh Bhatt
October 20, 2021
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ज़िद्द ज़िंदा है : Season–1
भय : एक अपयश 💥
हाय साहसी!
पग कांटों से भय करते हैं,
सह पत्थर की ठोकर मेंहदी रंग उगलते हैं,
कटु नोकों से पुष्पें भी तो हार बने,
अग्नी की लपटों में बर्तन भी आकार धरे,
प्रश्नों के बेड़े में मुख पर कैसा कौतूहल?
व्रत, तप कहां, कहां लीन है बुद्धि बल?
कहां बहु भुज नश-नश के आग गये?
नभ गर्जन सा कहां मुख राग गये?
कष्ट नहीं हो मौन या दुर्बल सा हाल हुआ,
भेदा हिय को जो शब्दों का आकाल हुआ,
कष्ट नहीं धुंधलाई आंखें या निश्चय का हास्र हुआ,
भेदा हिय को जो अनल रुधिर यह भाप हुआ,
पूछो हिय से घोर घटा क्यों मनु अम्बर में?
नयन भरें जल या नयन समन्दर में!
हाय तेजश्वी!
पथ की काली से डरता है,
नव किरणें ले प्रात: सूर्य निकलता है,
निकाला लौ चिराग भी जिसका काल बने,
दिनकर को भी अब निशा छले!
संकल्प श्रेष्ठ!
सहन नहीं यह शोक विकल,
मन: स्थिति दुर्बल अदृश्य मुख भाव सकल।
स्मरण निज जप, तप, व्रत, गुण रस भय
जय जीता नहि पालो यह अपयश।
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
कभी हार मान लेने का मन हुआ, तो कलम ने कहा — “ज़िद्द ज़िंदा है।” यहीं से शुरू हुई इस सीरीज़ की कहानी — उन लोगों की, जो टूटे तो सही, मगर बिखरे नहीं। जो गिरे, मगर हर बार उठ खड़े हुए।
‘Zidd Zinda Hai’ सिर्फ कविताओं का नाम नहीं, एक सोच है — कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला सांस ले रहा है, तो जीत अब भी मुमकिन है।
इस सीरीज़ की कई कविताएँ Amar Ujala Kavya पर भी प्रकाशित हैं और ये मेरे किताब “ये आसमां तेरे कदमों में है” का भी हिस्सा हैं।
मैं ऋषभ भट्ट, profession से एक engineer पर दिल से एक Writer हूँ। मेरी कलम ने हमेशा कोशिश की है कि शब्द सिर्फ पढ़े न जाएँ, बल्कि किसी के भीतर सोई हुई उम्मीद को जगाएँ।
मेरी किताबें — मेरा पहला जुनूं इश्क़ आख़री, ये आसमाँ तेरे क़दमों में है, Sindhpati Dahir 712 AD …और कई अन्य रचनाएँ Notion Press, Pothi.com, Amazon, Flipkart सहित सैकड़ों प्लेटफ़ॉर्म्स पर उपलब्ध हैं।
एक आखरी बात, ‘जब तक साँसें हैं, जब तक सपने ज़िंदा हैं, ज़िद्द भी ज़िंदा है। 💪✨’
बहुत खूबसूरत रचना
ReplyDeleteभय पर जय कविताओं के संग 👌👌👌👌
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteBhut sundar kavita
ReplyDelete👌👌👌👌👌👌👌👌
ReplyDeleteFantastic
ReplyDeleteJhakaaas poem
ReplyDeleteVery nice poem
ReplyDeleteBeautiful
ReplyDeleteJai ho
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