Utsav Diary : Holi Special 🎨
Shayari Holi Vishesh...
बादलों से एक ख़ूबसूरत चीज लाया हूँ, तेरे लिए
उसमें इंद्रधनुष के रंगों को मिलाया हूँ, तेरे लिए
अंगड़ाईयों से उठकर निग़ाहों ने गोलियां चलाई हैं
घायलों की बस्ती में अपना नाम लिखाया हूँ, तेरे लिए
अब हंसता तो नहीं, पर रोना भी छोड़ चुका हूँ
दिल के हर रास्ते को तुम्हारी तरफ मोड़ चुका हूँ
ज़रा ठहर जाओ ऐ रंग ! यूं न तुम धुलो
जिंदगी के रंगीनियों को किसी हथौड़े से तोड़ चुका हूँ
तुम कोई मौसम हो जो बहार बनके आती हो
खुद तो सुलझी हुई पर मुझे उलझाती हो
क्या करूं ? मैं तुम्हें हर बार रंगना चाहता हूँ
पर तुम ही गालों पे अपनी होंठों का निशान छोड़ जाती हो
मुसीबत तो है, जो तुमसे अकेले में मिलना पड़ता है
कोई देख न ले ये सोचकर सम्हलना पड़ता है
रंगों में डुबाकर एक हसीन शाम लाई आज तुम्हें
तुम किसी और को रंग लगाती हो, तो दिल को जलना पड़ता है
🌿 Written by Rishabh Bhatt 🌿
✒️ Poet in Hindi | English | Urdu
💼 Engineer by profession, Author by passion
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